गुना, 13 मार्च (हि.स.)। शनिचरी अमावस्या पर शहर के शनि मंदिरों में साढ़े साती और ढैया के जातकों के साथ ही अन्य श्रद्धालुओं द्वारा परंपरागत रूप से शनिदेव की पूजा अर्चना की गई। इस मौके पर शनि मंदिरों पर दिन भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। शनिवार को सुबह से शनि मंदिरों में भक्तों ने पहुंचकर तेल अर्पित किया। दर्शन, पूजन अर्चन का सिलसिला सुबह से देर शाम तक जारी रहा। इस दौरान जनप्रतिनिधि से लेकर अधिकारी व आमजन हड्डी मिल, टेकरी रोड सहित अन्य शनि मंदिरों पर पहुंचे। यहां उन्होंने मत्था टेककर तिल व चमेली के तेल, उड़द, काला कपड़ा, लोहे के पात्र, उड़द और तिल से बने व्यंजन का भोग लगाए। शनिदशा वाले हुए नतमस्तक इस दौरान जिन जातकों पर शनि महाराज की दशा, अडैया, साढ़े साती शनि चल रहे हैं, ने मंदिर में विशेष पूजा अर्चना की तथा नतमस्तक होकर शनिदेव से कृपा बनाए रखने की प्रार्थना की गई। वहीं मंदिर परिसर में बनाए गए हवन कुंड में श्रद्धा से आहुतियां छोड़ी गई तथा दान पुण्य एवं प्रसाद वितरण किया गया। रुठियाई के नवग्रह शनिदेव मंदिर पर हुए जाप व अनुष्ठान . रुठियाई के श्यामनगर स्थित श्री नवग्रह शनिदेव मंदिर में जाप, अनुष्ठान सहित अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। मंदिर पर अलसुबह से ही दर्शनों के लिए श्रद्धालु पहुंचने लगे थे। यहां श्रद्धालुओं ने तेल, तिल से भगवान नवग्रह समेत शनिदेव का तेलाभिषेक किया। इसके बाद जाप, अनुष्ठान और हवन आदि धार्मिक कार्यक्रम पूरे दिन चलते रहे। मंदिर के पुजारी योतिषाचार्य पंडित कैलाशनारायण जोशी ने बताया कि अमावस्या के मौके पर शनिवार सुबह 7 बजे भगवान शनिदेव के तेल महाभिषेक से सभी धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत हुई। जिसके बाद पूरे दिन मंदिर में जाप, अनुष्ठान, हवन आदि हुए। शनिश्चरी अमावस्या के मौके पर मंदिर की विधुत व पुष्पों से आकर्षक साज सज्जा की गई थी। जिसकी तैयारियां पिछले 3 दिनों से मंदिर समिति द्वारा की जा रही थी। हिन्दुस्थान समाचार / अभिषेक




