गुना, 15 जून (हि.स.) । देश में होने वाले धनिया के कुल उत्पादन में गुना जिले की हिस्सेदारी 25 फीसद होती है। इतना ही नहीं, जिले में पैदा होने वाला धनिया विदेशों तक में जाता है। एक जानकारी के मुताबिक जिले में प्रति वर्ष 32,000 मीट्रिक टन धनिया का उत्पादन होता है। प्रदेश सरकार द्वारा एक जिला एक उत्पाद के अंतर्गत गुना जिले में धनिया उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। पहले स्थान पर है गुना बताया जाता है कि पूरे देश में 3 जिलों में धनिया का प्रमुखत: उत्पादन होता है। जिनमें गुना प्रथम, रामगंज मंडी राजस्थान द्वितीय और गोंडल गुजरात तृतीय क्रम पर है। गुना जिले के प्रमुख धनिया उत्पादक क्षेत्र कुंभराज, बमोरी, चांचौड़ा, मधुसूदनगढ़, म्याना, बीनागंज हैं। धनिया उत्पादन से जुड़े लोगों ने बताया कि जिले में छोटा धनिया एवं मोटा धनिया दो प्रकार का धनिया पैदा होता है। गुना जिले का छोटा धनिया खुशबुदार होता है। जिसकी महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली में भारी मांग रहती है। मोटा धनिया मुख्यत: धनिया की दाल (मुखवास) निर्माण में उपयोग होता है। चार इकाईयां करती है धनिया दाल का निर्माण गुना जिले में चार इकाईयॉ धनिया दाल का निर्माण करती हैं। इनकी क्षमता लगभग 1200 एमटी प्रतिवर्ष है। धनिया दाल का निर्यात गुजरात एवं महाराष्ट्र में होता है। जिले में धनिया क्लीनिंग एवं धनिया पावडर की छोटी-बड़ी लगभग 100 इकाईयाँ कार्यरत हैं। जिनमें रूपये 12 करोड़ का स्थाई पूंजी विनियोजन होकर लगभग 1500 व्यक्तियों को प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रोजगार मिला हुआ है। ये इकाई लगभग 10000 एमटी धनिया की प्रोसेसिंग कर रही हैं। इनमें एक इकाई मेसर्स पीसी कन्नन एण्ड कम्पनी जो कि स्पाईसेस पार्क, ग्राम मावन में स्थापित है। विभाग द्वारा इस इकाई को उद्योग निवेश अनुदान, ब्याज अनुदान एवं मण्डी शुल्क से छूट प्रतिपूर्ति जैसी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई हैं। इस इकाई द्वारा क्रमश: दुबई एवं मलेशिया को वर्ष 2019-20 में 232 एमटी के धनिया पावडर का निर्यात किया है। शेष इकाईयाँ सीधे निर्यात न कर गुजरात, महाराष्ट्र एवं इन्दौर के निर्यातकों के माध्यम से विदेशों में निर्यात कर रहे हैं। हिन्दुस्थान समाचार / अभिषेक




