गिरिडीह, 18 अप्रैल ( हि.स.)। जैन-धर्म के विश्व प्रसिद्ध तीर्थस्थल मधुबन पारसनाथ की तराई में अवस्थित इस धार्मिक स्थल में वर्ष भर देश-विदेश से यात्री आते रहते हैं। होली के पहले और होली के बाद अप्रैल, मई माह तक यहां यात्रियों का आगमन काफी संख्या में होता है लेकिन इस बार फिर यात्रियों की संख्या में काफी कमी आयी है। इसका मुख्य कारण कोरोना संक्रमण है। आलम यह है कि दुकानें बंद हो गयी हैं। कई संस्था के मुख्य द्वार भी बंद हैं। सड़कों पर सन्नाटा पसरा है। विगत वर्ष भी होली के समय से यही स्थिति बनी थी। इस बार होली से पहले लोगों को यह उम्मीद थी कि काफी भीड़ रहेगी और दुकानदारी भी अप्रैल-मई तक चलेगी लेकिन कोरोना की दूसरी लहर ने यहां के दुकानदारों के साथ-साथ स्थानीय लोगों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है । दुकानदार कहते हैं कि 12-13 माह से आर्थिक परेशानी झेल रहे हैं। डोली मजदूर का भी यही हाल है । डोली मजदूरों के समक्ष .घोर आर्थिक संकट है। आलम यह है कि रोजाना यात्रियों को डोली में बैठाकर कांधे पर लादकर पर्वत वंदना करने वाले सैकड़ों मजदूर के हाथों में कोई काम नहीं है। बहरहाल कोरोना का असर सीधे तौर पर मधुबन के बाजार पर पड़ा है। यहां के लोग मायूस हैं और यही कामना कर रहे हैं कि जल्द से जल्द स्थिति सामान्य हो ताकि तीर्थ क्षेत्रों तत्काल आवाजाही शुरू हो सके। हिन्दुस्थान समाचार / कमलनयन/चंद्र




