रांची, 17 जून (हि. स.)। कांग्रेस विधायक बंधु तिर्की ने मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री को पत्र लिखकर भूमिहीन आदिवासी व अन्य परंपरागत वन निवासियों को वन पट्टा उपलब्ध करा कर उन्हें संरक्षित करने की दिशा में पहल करने की मांग की है। तिर्की ने गुरुवार को अपने लिखे पत्र में कहा है कि विगत 2019 के विधानसभा चुनाव के दौरान मौजूदा सरकार के प्रमुख घटक दल झामुमो और कांग्रेस ने आदिवासियों एवं अन्य परंपरागत वन निवासियों के साथ न्याय किए जाने की बात कही थी। मुख्यमंत्री द्वारा भी घोषणा किया गया था कि सरकार के प्रथम वर्षगांठ में 20 हजार व्यक्तिगत और दो हजार सामुदायिक वन पट्टो की सौगात वन आश्रित समुदायों को दी जाएगी। लेकिन अब तक पूरे राज्य में दो हजार व्यक्तिगत पट्टे और लगभग 800 सामुदायिक पट्टे ही दिए गए हैं, जो पट्टे दिए गए हैं उनमें जमीन का रकबा इतना नहीं है कि खेती-बारी कर इससे आजीविका सुनिश्चित की जा सके। कम्युनिटी फॉरेस्ट रिसोर्स लर्निंग एंड एडवोकेसी (सीएफआर- एलए) के अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक झारखंड की कुल 81 विधानसभा सीटों में 62 विधानसभा सीटों पर वन आश्रित समुदायों का प्रभाव है। इन 62 विधानसभा सीटों के 77 प्रतिशत वोटर वन अधिकार कानून के तहत वन पट्टे के हकदार हैं। लगभग 46 हजार एकड़ वन भूमि पर वन अधिकार कानून के तहत इनका दावा बनता है। इन गांवों की संख्या लगभग 11 हजार है। इस कानून के लागू होने के 15 साल बाद भी पट्टा लेने वालों का आंकड़ा एक लाख तक नहीं पहुंच पाया है। स्थिति यह है कि लातेहार, पलामू, पश्चिम सिंहभूम, सिमडेगा सहित एक दर्जन से ज्यादा जिलों में पट्टा वापसी के आंदोलन ने जोर पकड़ लिया है। फॉरेस्ट ब्यूरोक्रेसी अब तक हावी है। जानकारी के अनुसार कई जिलों में डीएफओ ने वन पट्टे पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया। लातेहार और दुमका में दर्जनों अधिकार पत्र तैयार हैं लेकिन डीएफओ द्वारा वन पट्टे पर हस्ताक्षर करने से इनकार किए जाने की वजह से वांछित लोगों को वन पट्टे नहीं दिए जा सके हैं। वर्तमान सरकार से झारखंड के आदिवासियों एवं मूलवासियों को काफी उम्मीदें हैं। हिन्दुस्थान समाचार/कृष्ण




