रांची, 05 जून (हि.स.)। सेंटर फॉर एनवायरमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) ने शनिवार को विश्व पर्यावरण दिवस के थीम ‘पारिस्थितिकी तंत्र की पुनर्स्थापना’ (इकोलॉजिकल रिस्टोरेशन) के अनुरूप दो फेसबुक लाइव परिचर्चा सत्र आयोजित की। जिसका मकसद हमारे पर्यावरण को स्वस्थ और स्वच्छ बनाने से जुड़े दूरदर्शी एवं वैज्ञानिक समाधानों पर विचार-विमर्श करना और लोगों के सामूहिक प्रयासों का आह्वान करना था। पहला सत्र ‘सततशील भविष्य के लिए पारिस्थितिकी तंत्र का पुनरुद्धार’ विषय पर चर्चा को समर्पित था। वहीँ दूसरे सत्र का विषय "ऊर्जा दक्षता के जरिए पारिस्थितिकी तंत्र में सुधार’ था और दोनों परिचर्चा समग्र तौर पर पर्यावरण को हो रहे नुकसान को रोकने और व्यावहारिक समाधानों के जरिए हमारी धरती को सुरक्षित बनाने पर केंद्रित थी। दरअसल यह कार्यक्रम सीड द्वारा एक महीने तक चलाए गए ऑनलाइन सोशल मीडिया कैंपेन ‘हील द इकोसिस्टम’ का एक अभिन्न अंग था। इसके तहत विश्व पर्यावरण दिवस पर पलामू के उपायुक्त शशि रंजन, पाकुड़ के उपायुक्त कुलदीप चौधरी, देवघर के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री, चतरा के उपायुक्त दिव्यांशु झा और रांची रेल मंडल के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी नीरज कुमार के वीडियो संदेश को भी सीड के सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आम जनता की जागरूकता के लिए प्रसारित किया गया। जिसे बड़ी संख्या में यूजर्स ने देखा। इसके अलावा इस कैम्पेन को राज्य की प्रमुख हस्तियों, शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों, सिविल सोसाइटी संगठनों एवं आम नागरिकों से सराहना मिली। ‘सतत भविष्य के लिए पारिस्थितिकी तंत्र का पुनरुद्धार’ विषय पर केंद्रित सत्र को पद्मश्री प्रोफेसर रवींद्र कुमार सिन्हा (कुलपति, श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय, जम्मू) ने संबोधित किया, जो ‘डॉलफिन मैन ऑफ़ इंडिया’ के रूप में लोकप्रिय हैं। उन्होंने पर्यावरण को बेहतर करने के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर देते हुए कहा कि, "प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और जलीय जीवन एवं वन्यजीवों को विलुप्त होने से बचाने के लिए हमें सततशील उपायों के जरिए पारिस्थितिक तंत्र को फिर से जीवंत करने की आवश्यकता है। हमें अपने प्राकृतिक परिवेश के सुंदर जीवों की कीमत पर भौतिकवादी लिप्सा में लिप्त नहीं रहना चाहिए, बल्कि सहअस्तित्व के सिद्धांत के अनुरूप एक-दूसरे पर पारस्परिक रूप से निर्भर परिवार की तरह आचरण करना चाहिए। एक स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने, जैव विविधता के नुकसान को रोकने, सभी की आजीविका सुनिश्चित करने और दुनिया को सुरक्षित एवं शांतिपूर्ण बनाने में सक्षम है। हिन्दुस्थान समाचार/ विकास




