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पैर धौने, मड़वा जैसी रस्म अपनाकर जनजातियों की भावना से खिलवाड़ कर रहे ईसाई धर्म गुरु: प्रिया मुंडा

खूंटी, 02 अप्रैल(हि .स.)। ईसाई धर्मावलंबी सीधेसादे जनजातियों की भावना से खिलवाड़ कर रहे हैं। कभी सेवा के नाम पर तो कभी शिक्षा के नमा पर प्रलोभन देकर आदिवासियों को धर्माजरण किया जा रहा है। यह कहना है बैंक अधिकारी रही व खूंटी की रहने वाली प्रिया मुंडा का। हिन्दुस्थान समाचार से बातचीत में प्रिया मुंडा ने कहा कि जब आदविासियों का धर्मातरण कम होने लगा और आदिवासी समाज जब अपनी परंपरा को छोड़ने को तैयार नहीं हुआ, तो ईसाई धर्मगुरुओं ने आदिवासियों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि सरना समाज में ही मेहमानों और बड़े लोगों के पैर धोने की परंपरा है। यहां तक कि शादी के दौरान मड़वा आदि का रस्म भी ईसाइयों में नहीं होता, लेकिन जनजातियों की भावना से खिलवाड़ करते हुए ईसाई धर्मावलंबी अब पैर धोने, मड़ा का रस्म करने जैसे ढ़ोंग करते हैं, पर ईसाइयों के धर्मग्रंथ में इन विधानों का कही वर्णन नहीं है। यह सिर्फ आदिवासियों की भावना से खिलवाड़ है। प्रिया मुंडा ने कहा कि वे बहुत दिनों तक ईसाई समाज का अंग रहीं, पर उनकी गलत बातों का उन्होंने हमेशा विरोध किया और अंततः उन्होंने पुराने धर्म में घ्र वापसी कर ली। प्रिया मुंडा ने कहा कि जब ईसाई धर्म गुरु ईसाई बनाने में असफल हो रहे हैं, तो वे भोलेभाले ग्रामीणों को उन्हीं कर परंपरा में रखकर ईसाई धर्म का अनुसरण कराने का षडयंत्र कर रहे हैं। अवैध प्रवासियों की जनसंख्या छिपाने के लिए है हो रही है अलग धर्म कोड की मांग: लक्ष्मण आदिवासियों के धर्म परिवर्तन और अलग धर्म कोड या ओआरपी की मांग पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए लक्ष्मण राजसिंह मरकाम ने कहा कि भारत के ससंविधान के अनुच्छेद 342 अनुसार अनुसूचित जनजातियों के लिए जनसंख्या के अनुरूप केंद्रए राज्य ज़िला व अनुसूचित क्षेत्र में आरक्षण के प्रावधान हैं। इसीलिए जनगणना का भारत के जनजातियों के लिए सीधा असर उनके संवैधानिक अधिकारों की प्राप्ति से संबंधित है। उन्होंने कहा कि विगत चार दशकों की जनगणना का विश्लेषण करने पर महत्वपूर्ण जनसांख्यिकीय परिवर्तन नजर आता है। पूर्वी पाकिस्तान विभाजन उपरांत ही एक अल्पसंख्यक वर्ग ने जनजातीय बहुल इलाक़ों में अवैध घुसपैठ की है। अब तक वे किसी प्रकार खुद को छिपाते आये हैं। मरकाम ने कहा कि कई अनुसूचित जाति समुदाय अनभिज्ञतावश जनगणना में भारत से बाहरी हिंदू , सिख व बौद्ध के अलावा लिखवाते हैं, पर जाति प्रमाण पत्र में भारतीय धर्म ताकी आरक्षण का लाभ भी मिलता रहे। उन्होंने कहा कि आधार कार्ड की अनिवार्यता और उसमें अगर वो विदेशी धर्म लिखवाएं तो वो स्वीकार ना हो। उन्होंने कहा कि इसके लिए आधार कार्ड की अनिवार्यता होनी चाहिए। आधार कार्ड अनिवार्य करेंगे, तो किस क्षेत्र में जनजातियों की संस्कृतिए भारत से बाहरी धर्मों में परिवर्तन के कारण व अवैध प्रवासियों के कारण नष्ट हो चुकी है संस्कृति का आकलन होगा। भविष्य में यदि अनुसूचित क्षेत्र की अधिकांश आबादी अभारतीय धर्म व संस्कृति में परिवर्तित हो जाए, तो उनका अनुसूचित क्षेत्र हटा देना चाहिए, चूंकि मतांतरण से उनकी सांस्कृतिक पहचान बदल गई है। हिन्दुस्थान समाचार/अनिल

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