गोड्डा, 4 जून (हि.स.)। ग्लोबल वार्मिंग को कम करने के लिए पर्यावरण को संरक्षण करना बेहद जरूरी है। पर्यावरण संरक्षण का एक कार्य ईसीएल की राजमहल परियोजना में कार्यरत फोरमैन इंचार्ज बोनस मरांडी लंबे समय से करते आ रहे हैं। सारी सुविधाएं होने के बावजूद अपने पर्यावरण की सुरक्षा में अपनी योगदान करने की ललक ने उन्हें साइकिल को अपनी सवारी करने की सोच दी। उन्होंने यह तय कर लिया की अपनी ड्यूटी वे साइकिल से ही करेंगे। नए एवं आधुनिक साइकिल पर सवार होकर वे रोजाना उर्जा नगर स्थित अपने क्वार्टर से राजमहल ओसीपी कार्यालय तक 4 से 5 किलोमीटर का सफर साइकिल से ही तय करते हैं। शुक्रवार को अपनी साइकिल लेकर ड्यूटी पर आने के क्रम में पूछे जाने पर उन्होंने बड़े ही सादगी से जवाब दिया कि पर्यावरण की सुरक्षा करनी चाहिए यह सोच तो सभी की है पर इसमें अपना योगदान क्या हो यह कैसे हम कर सकते हैं यह महत्वपूर्ण है। बताया कि साइकिल से वे अपने को फिट रखते हैं, देश की सीमित संसाधन को संरक्षित रखने में अपनी भूमिका भी अदा कर रहे हैं। बताया कि मुझे अब संतोष महसूस होता है आखिर कुछ तो इस प्रकृति के लिए मैं भी कर पा रहा हूं। उनका मानना है कि सोच ही सबसे बड़ी बात है हम जैसा सोचेंगे वही तो कर पाएंगे। रोजाना ड्यूटी आने जाने के क्रम में तथा घरेलू कार्यों में ₹100 से ज्यादा की बचत भी हो जाती है तथा सेहत के साथ-साथ पर्यावरण की सुरक्षा के साथ अब एक अलग पहचान बनने लगी है, जो मुझे काफी सुखद लगता है। यह पूछे जाने पर कि यह कैसे आइडिया उन्हें आया, बताते हैं कि इसमें आइडिया की क्या बात है करने की बात है। मेरे पूर्वज भी ऐसा करते थे तभी साइकिल को जोर लगाकर चलाना पड़ता था, पर आज मेरी साइकिल में बैटरी लगा हुआ है एक्सीलेटर पर काम करता है पाएडिल भी चला सकते हैं तो आधुनिकता का संगम यदि साइकिल में ही मिले तो इसे अपनाने में क्या बुराई है। कहते हैं कि यदि पूरे देश के लोग एक दिन एक समय का भोजन नहीं करें तो सोचिए कितना टन अनाज बचेगा? इसी प्रकार मैं एक बूंद बचा रहा हूं। एक एक व्यक्ति यदि पूरे पृथ्वी पर एक एक वृक्ष लगाएं तो एक दिन में अरबों वृक्ष लग सकते हैं। पर पूरा मामला बस सोच से जुड़ा हुआ है। बोनस मारंडी स्थानीय सिमरा गांव के रहने वाले हैं। उनकी जमीन ईसीएल में गई तो तभी से वह राजमहल परियोजना में कार्यरत हैं। पर्यावरण को लेकर उनकी हमेशा से कुछ करने की सोच रही है,जिसे पूरा करने के लिए वे घरों में तरह-तरह के पौधे लगाते हैं तो घर से बाहर साइकिल से चलकर लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हैं। हिन्दुस्थान समाचार/ रंजीत




