जम्मू, 15 जून (हि.स.)। नशीली दवाओं का सेवन समाज में एक सामाजिक बुराई और खतरा है जो समाज के सभी वर्गों के जीवन को नुकसान पहुंचाता है। कोई भी व्यक्ति उम्र, लिंग, आर्थिक स्थिति आदि की परवाह किए बिना नशाखोरी से प्रभावित हो सकता है। बहुत से लोगों को यह एहसास नहीं होता है कि व्यसन एक पुरानी, प्रगतिशील स्थिति है जिसके लिए पेशेवर उपचार, सहायता और समर्थन की आवश्यकता होती है। मादक द्रव्यों का सेवन न केवल इसका सेवन करने वाले को ही प्रभावित करता है बल्कि इसका दूरगामी प्रभाव होता है जिसमें परिवार, मित्र और समुदाय शामिल होता है। इस मुद्दे पर युवाओं को जागरूक करने के लिए मंगलवार को जिला राजौरी के परगाल में सेना द्वारा नशीली दवाओं के दुरुपयोग पर एक ऑनलाइन व्याख्यान आयोजित किया गया था। व्याख्यान के दौरान युवाओं को नशीली दवाओं के दुरुपयोग के विभिन्न पहलुओं के बारे में जागरूक किया गया, जिसमें नशीली दवाओं के प्रकार और स्वास्थ्य, परिवार और समाज पर उनके प्रतिकूल प्रभाव शामिल थे। चर्चा के दौरान नशा करने वालों के लक्षणों, उपचार और पुनर्वास पर उचित जोर दिया गया। वक्ता ने श्रोताओं को समझाया कि कैसे नशा तस्कर शुरू में कम कीमत पर मादक पदार्थों की आपूर्ति करके युवाओं को नशे के दुष्चक्र में धकेल कर उनके जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं और एक बार जब व्यक्ति इसका आदी हो जाता है, तो अपने लाभ के लिए किशोरों का शोषण करता है। इलाज के बारे में पूछे जाने पर वक्ता ने बताया कि दवाओं के लिए इलाज से बेहतर है रोकथाम। हालांकि, राज्य सरकार और गैर सरकारी संगठनों द्वारा विभिन्न पुनर्वास केंद्र चलाए जा रहे हैं जो न केवल नशा करने वालों का इलाज करते हैं बल्कि उन्हें सामान्य जीवन जीने में भी मदद करते हैं। दर्शकों ने ऐसे आयोजनों के आयोजन में सेना के प्रयासों की सराहना की, जो नागरिक आबादी, विशेष रूप से युवाओं में जागरूकता और सद्भावना की भावना पैदा करते हैं। हिन्दुस्थान समाचार/अमरीक/बलवान




