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जलजीवन मिशन में कोताही की होगी जांच : महेंद्र सिंह 

शिमला, 08 मार्च (हि.स.)। प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत यदि कहीं आधी अधूरी पाइपें लगाई गई या फिर किसी को बांटी गई तो उसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी। जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने सोमवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान भाजपा सदस्य रमेश धवाला के मूल और कांग्रेस सदस्य राम लाल ठाकुर के अनुपूरक सवाल के जवाब में यह बात कही। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत हर घर में नलका पहुंचाया जाएगा और विभाग द्वारा की घर तक पाइप लाइन बिछाई जाएगी। इससे पहले रमेश धवाला ने कहा कि जल जीवन मिशन में जो नलके लग रहे हैं, उससे पानी को सोर्स पर भार पड़ रहा है। उन्होंने पूछा कि क्या पेयजल स्रोत की केपेसिटी को भी बढ़ाया जाएगा। साथ ही पूछा कि क्या तीन-तीन और पांच-पांच पाइपें क्यों दे रहे, जबकि नकले घर के अंदर लगाने हैं। महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि नलके लगाने का काम पहले चरण में हो रहा है और पेयजल स्रोत की क्षमता बढ़ाने का काम दूसरे चरण में किया जा रहा है और यह कार्य 2024 तक चलेगा। उन्होंने कहा कि पानी की पाइपें घरों तक विभाग के माध्यम से ही बिछाई जा रही है और किसी भी व्यक्ति विशेष को नहीं दी जा रही है। कांग्रेस सदस्य ठाकुर राम लाल ने जानना चाहा कि श्री नैना देवी में पहले चरण में जल जीवन मिशन के तहत घरों तक पानी नहीं पहुंचाया जा रहा है और कम पाइपें लगाकर विभाग कह रहा है कि वे खुद आगे अपनी पाइपें लगाएं। क्या इसकी जांच करवाई जाएगी। इस पर जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि पानी की पाइपें कहीं नहीं बांटी जाएगी। उन्होंने विश्वास दिलाया कि कोई भी पाइप आधी नहीं छोड़ी जाएगी और घर तक ही लगेगी। किसी भी परिवार को प्लास्टिक की पाइप नहीं लगानी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि इस मामले में यदि कोई कोताही होगी, तो उसका पता लगाकर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत 2019-20 में भारत वर्ष में हिमाचल प्रथम स्थान पर रहा है। भारत सरकार ने इसके लिए इंसेंटिव दिया है। उन्होंने कहा कि 2020-21 में इस मिशन के तहत मिलने वाली राशि की हिमाचल सरकार को चारों किस्त एक साथ मिली है। जबकि अन्य राज्यों को यह राशि चार किस्तों में दी जा रही है। उधर, सीर खड्ड तटीकरण को लेकर विधायक कर्नल इंद्र द्वारा पूछे गए सवाल पर जलशक्ति मंत्री ने कहा कि प्रदेश में कई खड्ड ऐसी हैं, जिसमें बरसात में भारी मात्रा में पानी आने से जमीनों व घरों को नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि सीर खड्ड के तटीकरण में तीन जिले आते हैं। इसमें मंडी, हमीरपुर और बिलासपुर जिले का हिस्सा आता है। उन्होंने कहा कि 2011-12 में इस परियोजना को लेकर शिलान्यास किया था, लेकिन कार्य नहीं हुआ था। ठाकुर ने कहा कि उनकी सरकार ने इस प्रोजेक्ट की फिर से डीपीआर बनाई। अब इसकी डीपीआर 157.66 करोड़ रुपए की बनी। इसकी डीपीआर बनने के बाद भारत सरकार से मामला उठाया और अब वहां से कहा कि टेंडर करवाएं। उनका कहना था कि अब टेंडर किए हैं और अब बाकी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं और केंद्र से क्लीयरेंस मिलने के बाद आगे कार्य अवार्ड होगा। महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि तीन वर्ष में फ्लड प्रोटेक्शन और फ्लड मैनेजमेंट की कई योजनाओं को केंद्र सरकार से उठाया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को छह परियोजनाओं का शैल्फ भेजा। इसमें शिमला, सिरमौर, कांगड़ा जिलों की परियोजनाओं के अलावा तीन जिलों की सीर खड्ड और स्वां चेनेलाइजेशन का मामला केंद्र के पास है। इन छह परियोजनाओं की इन्वेस्टमेंट क्लीयरेंस हो चुकी है और वहां से बाकी क्लीयरेंस होने के बाद इनके कार्य शुरू हो जाएंगे। हिन्दुस्थान समाचार/उज्ज्वल/सुनील

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