नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। तीन निर्दलीय विधायकों के हरियाणा की बीजेपी सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद नायब सिंह सैनी सरकार पर मुसीबत के बादल छाते दिख रहे हैं। बीजेपी का कहना है कि सरकार पर कोई खतरा नहीं है, पर विपक्ष का दावा है कि सरकार के पास बहुमत नहीं है। JJP के दुष्यंत चौटाला भी सैनी की सरकार गिराने के लिए कांग्रेस का साथ देने का दावा ठोक चुके हैं। इतना ही नहीं उन्होंने राज्यपाल को पत्र लिखकर विधानसभा में फ्लोर टेस्ट की मांग भी कर दी है।
क्या कहता है हरियाणा विधानसभा का गणित
दरअसल हरियाणा की 90 सदस्यीय विधानसभा में वर्तमान में 88 विधायक हैं। इनमें से 40 भाजपा, 30 कांग्रेस, 10 जजपा, 6 निर्दलीय और 1-1 विधायक हलोपा और इनेलो से हैं।
चौटाला का राज्यपाल को पत्र
दुष्यंत चौटाला का दावा है कि उन्हें सदन में विपक्षी दलों का समर्थन पाप्त है। दुष्यंत चौटाला ने राज्यपाल को पत्र लिख कर कहा है कि वह मौजूदा सरकार का समर्थन नहीं करते है। साथ ही उन्होंने अपने पत्र में यह भी लिखा कि मौजूदा सरकार के अलावा किसी भी अन्य दल के सरकार में आने से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। इसलिए उन्होंने राज्यपाल से पत्र में मांग की है कि हरियाणा को मौजूदा सरकार का फ्लोर टेस्ट करवाया जाए।
क्या होता है फ्लोर टेस्ट?
फ्लोर टेस्ट के जरिए सदन में इस बात का निर्णय होता है कि वर्तमान सरकार के पास बहुमत है या नहीं। फ्लोर टेस्ट के लिए सभी दलों द्वारा अपने विधायकों को व्हिप जारी किया जाता है कि तय दिन पर वो सदन में मौजूद रहें। अगर कोई विधायक मौजूद नहीं होता है तो मान लिया जाता है कि उसने दल बदल लिया है। फ्लोर टेस्ट करवाने का आदेश राज्यपाल देते हैं और फ्लोर टेस्ट विधानसभा अध्यक्ष द्वारा कराया जाता है। अगर राज्य की वर्तमान सरकार बहुमत प्राप्त करने में असफल हो जाती है तो मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना पड़ता है।
क्या कहता है नियम
नियम मौजूदा सरकार के हित में हैं। कांग्रेस द्वारा मार्च में ही अविश्वास प्रस्ताव सदन में लाया गया था। जिसपर सैनी सरकार ने विश्वास प्राप्त किया था। नियम की बात करें तो मौजूदा सरकार के खिलाफ अगला अविश्वास प्रस्ताव पिछले प्रस्ताव के 6 महीने बाद ही लाया जा सकता है। यानी दो अविश्वास प्रस्ताव के बीच 180 दिन का गैप होना चाहिए। लेकिन राज्यपाल चाहें तो फ्लोर की मंजूरी दे सकते हैं। फिलहाल के लिए जबतक राज्यपाल मंजूरी नहीं देते वर्तमान सरकार अगले विधानसभा चुनावों तक सुरक्षित है।
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