– माटी पूर्वांचल महोत्सव की ओर से ट्विटर स्पेस में काव्य गोष्ठियों की श्रृंखला जारी – पूर्वांचल से जुड़े नए-पुराने कवियों के कविता पाठ के अलावा कला, संस्कृति एवं साहित्य पर सकारात्मक चर्चा नई दिल्ली, 28 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के बलिया और मऊ जिले के साथ साथ संपूर्ण पूर्वांचल की धरती बहुत उर्वर है। इसका इतिहास स्वर्णिम तो है ही, आज़ाद भारत के निर्माण में भी इसकी भूमिका अद्वितीय है। इस भूमि ने अनेक साहित्यकार, बुद्धिजीवी, वैज्ञानिक, राजनेता, खिलाड़ी, समाजसेवी और प्रशासनिक अधिकारी देश को दिए हैं। उक्त विचार भारत सरकार के शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव व आईएएस एसोसिएशन के अध्यक्ष दुर्गाशंकर मिश्र ने ट्विटर स्पेस में आयोजित मऊ व बलिय को समर्पित एक कवि गोष्ठी में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि इस काव्य गोष्ठी में आकर उनके बचपन की बहुत सी यादें ताज़ा हो गईं। गांव-देहात, वहां की परंपराएं व मेले और उन मेलों में कवि सम्मेलन, नौटंकी देखने का जो सुखद अनुभव है, वे सब यादों में बसे हैं। उन्होंने कवियों से आग्रह किया कि वे कविता के माध्यम से पूर्वांचल के लोगों को आगे बढ़कर अपने क्षेत्र और राष्ट्र के विकास में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करें। आयोजक एवं माटी के संयोजक आसिफ़ आज़मी ने बताया कि काव्य गोष्ठियों की यह श्रृंखला सोशल मीडिया पर फैली नकारात्मकता के जंगलों के बीच सकारात्मकता एवं रचनात्मकता के कुछ ऐसे पेड़ लगाने की कोशिश है जिनकी छांव में सुकून और आत्मीयता के दो पल गुज़ारे जा सकें। साथ ही पूर्वांचल के रचनाकारों को जोड़ना और उनकी प्रतिभाओं को मंच देना भी एक उद्देश्य है। आज की कवि गोष्ठी में मऊ एवं बलिया के जिन कवियों ने पाठ किया उनमें आरएन श्रीवास्तव ‘परिचय दास’, मदन मोहन मिश्र ‘दानिश’, अख़लाक़ बंदवी, देवकांत पांडे, अविनाश पांडे, माधुरी मिश्र, शशांक शेखर सिंह, रुद्र प्रताप सिंह, राजीव उपाध्याय प्रमुख हैं। संचालन प्रखर मालवीय कान्हा ने किया। ज्ञात हो कि माटी पूर्वांचल महोत्सव की ओर से ट्विटर स्पेस में काव्य गोष्ठियों की श्रृंखला जारी है जिनमें पूर्वांचल से जुड़े नए-पुराने कवियों के कविता पाठ के अलावा वहां की कला, संस्कृति एवं साहित्य पर सकारात्मक चर्चा भी की जाती है। अब तक आज़मगढ़, प्रयागराज, ग़ाज़ीपुर, जौनपुर, मऊ व बलिया के कवियों को समर्पित कुल पांच आयोजन किए जा चुके हैं। हिन्दुस्थान समाचार/एम ओवैस




