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Saturday, March 14, 2026
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ये फैसला कानूनी नहीं, आशा की किरण है, Article 370 पर SC के फैसले के बाद बोले- PM मोदी, दिया नया J&K का स्लोगन

New Delhi: PM मोदी ने SC के अनुच्छेद 370 को हटाए जाने की वैधता बरकरार रखने के फैसले को ऐतिहासिक बताया है और कहा- कि यह जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों के लिए आशा, प्रगति और एकता की एक शानदार घोषणा है।

नई दिल्ली, हि.स.। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सुप्रीम कोर्ट के अनुच्छेद 370 को हटाए जाने की वैधता बरकरार रखने के फैसले को ऐतिहासिक बताया है और कहा है कि यह जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों के लिए आशा, प्रगति और एकता की एक शानदार घोषणा है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर किया ट्वीट

प्रधानमंत्री ने एक्स पर ट्वीट कर कहा, “आज का फैसला सिर्फ कानूनी फैसला नहीं है, आशा की किरण है, उज्जवल भविष्य का वादा है और एक मजबूत, अधिक एकजुट भारत के निर्माण के हमारे सामूहिक संकल्प का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपनी गहरी समझ से उस एकता को मजबूत किया है जिसे हम भारतीय होने के नाते बाकी सब से ऊपर मानते हैं और बनाए रखना चाहते हैं।

हैशटैग ‘नया जम्मू-कश्मीर’

प्रधानमंत्री ने अपने ट्वीट में ‘नया जम्मू-कश्मीर’ हैशटैग के साथ लिखा, “आज का फैसला सिर्फ कानूनी फैसला नहीं है; यह आशा की किरण है, उज्जवल भविष्य का वादा है और एक मजबूत, अधिक एकजुट भारत के निर्माण के हमारे सामूहिक संकल्प का प्रमाण है।”

केन्द्र सरकार की प्रतिबद्धता अटूट है

प्रधानमंत्री ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों को आश्वस्त किया कि उनके सपनों को पूरा करने के लिए केन्द्र सरकार की प्रतिबद्धता अटूट है। हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि प्रगति का लाभ न केवल आप तक पहुंचे बल्कि अनुच्छेद 370 के कारण पीड़ित हमारे समाज के सबसे कमजोर और हाशिए पर रहने वाले वर्गों तक भी पहुंचे।

आज सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई

बता दें कि जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। 5 जजों की संविधान पीठ की अध्यक्षता करने वाले मुख्य न्यायाधीश चंद्रजूड़ ने बताया कि 5 जजों की बेंच ने तीन अलग-अलग फैसले लिए हैं, लेकिन उनका निष्कर्ष एक ही है।

फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 370 को हटाने को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं की दलीलें खारिज कर दीं। कहा गया कि जम्मू-कश्मी भारत का अभिन्न अंग है। ऐसे में नियम है कि केंद्र राष्ट्रपति शासन के तहत राज्य सरकार की शक्ति का प्रयोग कर सकता है और संसद/राष्ट्रपति उद्घोषणा के तहत राज्य की विधायी शक्तियों का प्रयोग कर सकता है।

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