back to top
25.1 C
New Delhi
Monday, March 2, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

Pakistan News: पाकिस्तान में हैवानियत की सीमा पार, यौन शोषण पर कोई ऐक्शन नहीं, खुलेआम घुम रहें अपराधी

New Delhi: पाकिस्तान में कम उम्र के लड़के और लड़िकयों सहित अल्पसंख्यकों को शारीरिक यातनाओं का सामना करना पड़ता है। इस मामले पर बाल संरक्षण ने एक रिपोर्ट जारी की है।

नई दिल्ली, मुकुंद, हिं.स.। पाकिस्तान में कम उम्र के लड़के और लड़कियां न तो अपने घरों के भीतर महफूज हैं और न ही बाहर। इस मुल्क के प्रतिष्ठित ‘जिओ न्यूज’ चैनल की वेबसाइट पर उपलब्ध यह रिपोर्ट सभ्य समाज के लिए चिंताजनक है। यह रिपोर्ट बाल संरक्षण के लिए काम करने वाले एक गैर-लाभकारी संगठन ”साहिल” ने गुरुवार को जारी की है।

औसतन प्रतिदिन 11 बच्चे को प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है

इस रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023 में कम से कम 4,213 बच्चों को दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा। इस वर्ष औसतन प्रतिदिन 11 बच्चों को इस पीड़ा का सामना करना पड़ा। इस रिपोर्ट को ‘क्रूएल नंबर्स 2023’ शीर्षक से पाकिस्तान के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सहयोग से जारी किया गया है। आयोग ने रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि पिछले साल इस्लामाबाद, पाकिस्तान अधिकृत जम्मू और कश्मीर और गिलगित बाल्टिस्तान समेत सभी 4 प्रांतों से कुल 4,213 बाल दुर्व्यवहार के मामले सामने आए। रिपोर्ट से साफ है कि इन बच्चों का यौन शोषण ही नहीं किया गया, बल्कि उन्हें अपहरण कर बाल विवाह के दोजख के दावानल में झोंक दिया गया।

पाकिस्तान सरकार के पास बाल शोषण पर कोई अधिसूचित राष्ट्रीय कार्ययोजना नहीं

साल 2023 में इस नरक से 2,251 लड़कियों और 1962 लड़कों को गुजरना पड़ा। इनमें से अधिक संख्या 6-15 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की है। हद तो यह है कि हैवानों ने 5 वर्ष तक के बच्चों की आबरू पर डाका डाला। ऐसा करने में रिश्तेदार और परिवार के सदस्य भी पीछे नहीं रहे। आयोग की चेयरपर्सन राबिया जावेरी आगा का कहना है कि आंकड़े डरावने हैं। कुल 4,213 रिपोर्ट किए गए मामलों में से 75 फीसद पंजाब से 13 फीसद सिंध से 7 प्रतिशत इस्लामाबाद राजधानी क्षेत्र से 3 प्रतिशत खैबर पख्तूनख्वा और 2 प्रतिशत बलूचिस्तान से हैं। आगा ने कहा, ”हमें बाल शोषण के मुद्दे को गंभीरता से लेना होगा। ”साहिल” के आंकड़े वास्तव में क्रूर हैं, लेकिन एक वास्तविकता है जिसका हमें सामना करना होगा। इन चिंताजनक आंकड़ों को देखते हुए, यह दुखद है कि पाकिस्तान सरकार के पास अभी भी बाल शोषण पर कोई अधिसूचित राष्ट्रीय कार्ययोजना नहीं है।”

पाकिस्तान में हिंदू अल्पसंख्यक महफूज नहीं

”साहिल” की कार्यकारी निदेशक मनिजेह बानो ने कहा कि पाकिस्तान के संविधान में अनुच्छेद 25-ए 5 से 16 साल तक मुफ्त शिक्षा प्रदान करता है। “बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए इसे लागू किया जाना चाहिए। जीवन कौशल आधारित शिक्षा प्रदान करने के लिए पाठ्यक्रम में सुधार की सख्त जरूरत है।” ”साहिल” ने यह रिपोर्ट राष्ट्रीय और क्षेत्रीय समाचार पत्रों की खबरों के आधार पर तैयार की है। यह तो रही बात बच्चों के साथ जुल्म-ओ-सितम की। पाकिस्तान में अल्पसंख्यक भी महफूज नहीं हैं। पिछले साल जस्ट अर्थ न्यूज इस मसले पर एक रिपोर्ट छापी थी। इस रिपोर्ट में पाकिस्तान में हिंदू अल्पसंख्यक समूह के खिलाफ बढ़ते अपराधों का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट में सरकारी रवैये पर चिंता जताते हुए दावा किया गया था कि हिंदू अल्पसंख्यकों को जबरन धर्मांतरण से बचाने के लिए जबरन बातचीत निषेध अधिनियम 2021 का मसौदा कानून पर सुनवाई के बिना ही खारिज कर दिया गया।

कम उम्र की लड़कियों पर हो रहा अत्याचार

जस्ट अर्थ न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि पाकिस्तान में कम उम्र की लड़कियों को अगवा कर उनके साथ दुष्कर्म करने और धर्म परिवर्तन कराने की प्रथा आम हो गई है। मीडिया, नागरिक समाज और मानवाधिकार समूह ऐसे अपराध की उपेक्षा करते हैं क्योंकि ये लड़कियां निम्न आर्थिक और अल्पसंख्यक समुदायों से होती हैं। रिपोर्ट में 2022 में फैसलाबाद में एक 15 वर्षीय ईसाई लड़की के साथ हुई ऐसी घटना का जिक्र कर मीडिया, नागरिक समाज और मानवाधिकार समूह को कठघरे में खड़ा किया गया था। ह्यूमिटेरियन समाचार पोर्टल जस्ट अर्थ ने यह भी कहा था कि पाकिस्तान ऑनलाइन बाल शोषण के मामले में दुनिया में तीसरे नंबर पर है।

अल्पसंख्यकों खासकर हिंदुओं के साथ होने वाली ज्यादती छुपी

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों खासकर हिंदुओं के साथ होने वाली ज्यादती छुपी नहीं है। पाकिस्तान से जान बचाकर आए हिंदू भारत के अलग-अलग हिस्सों में शरणार्थी बनकर जिंदगी जीने को मजबूर हैं। 1 साल पहले राजस्थान के जोधपुर और जैसलमेर में इन शरणार्थियों के घरों को प्रशासन ने उजाड़ दिया था। इस घटना से इनका दर्द सुर्खियों में आ गया था। इनकी कहानियां कलेजा चीरने के लिए काफी हैं। ऐसे ही एक हैं, भीलजी राणा। वह पाकिस्तान के रहीमयार खान में मजदूरी करते थे। राणा के मुताबिक पाकिस्तान में उनकी बीवी खेतों पर मजदूरी कर रही थी। अचानक दाढ़ी वाले कुछ लोग आए और उसकी पत्नी-बेटी को अपने साथ ले गए। कुछ समय बाद जानकारी आई कि उनकी पत्नी के साथ गैंगरेप किया गया। कुछ दिन बाद उसका नाम बदलवाकर फातिमा कर दिया। बहुत मिन्नत पर बेटी को छोड़ा गया। इसलिए वह अपनी बच्ची को लेकर हिंदुस्तान आ गए।

पाकिस्तानी कट्टरपंथियों के आतंक से अल्पसंख्यक से भारत आ रहे

ऐसी एक हिंदू महिला जैसलमेर में मिली। उसके साथ पाकिस्तान में दुष्कर्म हुआ था। इसके बाद वह दहशत में आ गई और अपनी बेटी को पाकिस्तान में रिश्तेदार के पास छोड़ कर भागकर भारत आ गई। राणा का कहना था कि उस मुल्क के हालात ऐसे हैं कि लोग सिर्फ वीजा मिलने की तलाश में हैं। मौका मिले तो वो संपत्ति तो क्या अपने बच्चे भी छोड़ भाग जाएं। उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान में कट्टरपंथियों के आतंक के कारण अल्पसंख्यक लगातार वहां से भारत आ रहे हैं। सीमांत लोक संगठन की स्टडी के अनुसार, 1971 से करीब 7 लाख पाकिस्तानी विस्थापित होकर राजस्थान आए हैं।

(लेखक, हिन्दुस्थान समाचार से संबद्ध हैं, यह लेखक के निजी विचार हैं।)
अन्य खबरों के लिए क्लिक करें:- www.raftaar.in

Advertisementspot_img

Also Read:

पाकिस्तान में भूचाल, पूर्व ISI चीफ फैज़ हामिद को 14 साल की कैद, इमरान खान के करीबी की मुश्किलें बढ़ीं

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। । पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) के पूर्व प्रमुख, लेफ्टिनेंट जनरल फैज़ हामिद की मुश्किलें अभूतपूर्व तरीके से बढ़ गई हैं।...
spot_img

Latest Stories

Amitabh Bachchan ने सोशल मीडिया पर किया ऐसा ट्वीट, फैंस में मचा तहलका

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बॉलीवुड के मेगास्टार अमिताभ बच्चन सोशल...

बंगाल से राज्यसभा की दौड़ में नई एंट्री, ममता बनर्जी ने किया नॉमिनेट, आखिर कौन हैं कोयल मल्लिक?

नई दिल्‍ली/रफ्तार डेस्‍क । पश्चिम बंगाल में राज्यसभा की...

The Kerala Story 2 Day 1 Collection: कंट्रोवर्सी के बाद भी बॉक्स ऑफिस पर मजबूत ओपनिंग

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। कोर्ट केस और सियासी विवादों के...

तेहरान समेत ईरान के कई इलाकों में विस्फोट, इजरायल की बड़ी सैन्य कार्रवाई का दावा

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। अंतरराष्ट्रीय माहौल आज 28 फरवरी 2026...