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Monday, March 2, 2026
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दिल्ली में पीने के पानी की गुणवत्ता पर बड़ा संकट, CAG रिपोर्ट में भारी चूक उजागर, जांच में 55 फीसदी सैंपल फेल

दिल्ली में पीने के पानी को लेकर CAG की चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आयी है। रिपोर्ट में दिल्ली जल बोर्ड की जांच व ट्रीटमेंट प्रणाली कमजोर पाई गई है।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । दिल्ली में लोगों को मिलने वाले पीने के पानी की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे हैं। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली जल बोर्ड (DJB) द्वारा आपूर्ति किए जा रहे पानी की निगरानी और ट्रीटमेंट में व्यापक कमी पाई गई। यह रिपोर्ट 7 जनवरी 2026 को विधानसभा में पेश की गई थी, जिसके बाद जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया (JSAI) ने तत्काल सुधार और कार्रवाई की मांग की।

स्वास्थ्य के लिए खतरा

ऑडिट में सामने आया कि परीक्षण किए गए 16,234 भूजल सैंपलों में से लगभग 55 प्रतिशत पानी पीने योग्य नहीं था। अलग-अलग वर्षों में यह अनुपात 49 से 63 प्रतिशत के बीच रहा है। रिपोर्ट ने चेतावनी दी कि जिन इलाकों में पानी के नमूने फेल हुए हैं, वहां की सप्लाई सीधे जनता के स्वास्थ्य के लिए खतरा साबित हो सकती है।

दिल्ली में पानी की कमी और कमजोर जांच व्यवस्था

CAG रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि दिल्ली को रोजाना लगभग 1,680 मिलियन यूनिट पानी की जरूरत है, लेकिन वर्तमान में सप्लाई में करीब 25 प्रतिशत की कमी है। स्थिति और गंभीर इसलिए है क्योंकि जो पानी नागरिकों तक पहुंच रहा है, उसकी गुणवत्ता की सही निगरानी नहीं हो पा रही। जांच और मॉनिटरिंग सिस्टम बेहद कमजोर होने के कारण यह सुनिश्चित करना मुश्किल है कि पानी स्वास्थ्य के लिहाज से सुरक्षित है या नहीं। 

BIS मानकों के अनुसार जांच नहीं

CAG में यह भी खुलासा हुआ है कि दिल्ली जल बोर्ड की प्रयोगशालाओं में BIS (भारतीय मानक ब्यूरो) के नियमों के अनुसार पानी की जांच नहीं हुई। इसका मुख्‍य कारण स्टाफ और जरूरी उपकरणों की भारी कमी है। BIS मानकों के तहत जहां 43 तरह की जांच आवश्‍यक है, लेकिन DJB केवल 12 मानकों पर ही पानी की जांच कर खानापूर्ति कर रहा था। यहां कि आर्सेनिक, लेड जैसे जहरीले तत्वों और बैक्टीरिया की जांच करना भी जरूरी नहीं समझा। 

ऑडिट में चौंकाने वाला खुलासा

ऑडिट में यह भी चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि पिछले पांच वर्षों में रोजाना 80 से 90 मिलियन गैलन बिना ट्रीटमेंट का पानी सीधे बोरवेल और रैनी वेल से अंडरग्राउंड टैंकों और कई जगहों पर सीधे लोगों तक सप्लाई किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना शुद्धिकरण का पानी देने से डायरिया, पीलिया, टायफाइड जैसी जलजनित बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है। 

पानी की सप्लाई का सही आंकड़ा नहीं

CAG रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि दिल्ली के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, जलाशयों और बोरवेल्स पर फ्लो मीटर तक नहीं लगाए गए हैं। इसका सीधा असर यह है कि यह पता ही नहीं चल पाता कि कितना पानी ट्रीट हो रहा है और कितना बिना जांच के सीधे नागरिकों तक पहुंच रहा है। इससे स्पष्ट होता है कि जल बोर्ड में बुनियादी निगरानी व्यवस्था भी पूरी तरह से कमजोर है। 

गंदा पानी पीने से स्वास्थ्य को गंभीर खतरा

विशेषज्ञों की चेतावनी है कि दूषित या मिलावटी पानी पीने से शरीर पर गंभीर असर पड़ सकता है। गंदा पानी से डायरिया, पीलिया, टायफाइड जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा आर्सेनिक और लेड के कारण कैंसर और अन्य गंभीर रोग हो सकते हैं। वहीं, सांक्रामक बैक्टीरिया से पेट और आंतों से संबंधित संक्रमण हो सकते हैं। जबकि किडनी और लीवर की कार्यक्षमता पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। 

JSAI ने सरकार से की सुरक्षित पानी के लिए कड़े कदम उठाने की मांग

जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया (JSAI) ने जोर देकर कहा है कि साफ और सुरक्षित पेयजल हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। संगठन ने चेतावनी दी कि सरकार की अनदेखी से जनता का भरोसा कमजोर हो रहा है। JSAI ने सरकार से मांग की है कि पानी की गुणवत्ता में लापरवाही करने वालों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई हो। दिल्ली के हर घर तक सुरक्षित और स्वच्छ पानी सुनिश्चित करे। जल बोर्ड की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए ठोस कदम उठाएं। साथ ही प्रयोगशालाओं को आधुनिक तकनीक से लैस किया जाये। 

स्वास्थ्य रिपोर्ट बन सकती है राजनीतिक मुद्दा

यह रिपोर्ट सामने आने के बाद दिल्ली विधानसभा चुनाव में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। विपक्ष ने पिछली सरकार पर जनता के स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही का आरोप लगाया है। भाजपा ने रिपोर्ट को AAP सरकार की असफलता बताया। वहीं, AAP का दावा है कि यह केंद्र सरकार की राजनीति से प्रेरित कोशिश है। इस रिपोर्ट ने चुनावी बहस में नया मोड़ जोड़ दिया है।

विशेषज्ञों ने तत्काल सुधार की आवश्यकता जताई

विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली जल बोर्ड की कार्यप्रणाली में गंभीर सुधार की जरूरत है। उनका कहना है कि सभी प्रयोगशालाओं को BIS मानकों के अनुरूप आधुनिक बनाया जाए। पर्याप्त स्टाफ और उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। प्रत्येक ट्रीटमेंट प्लांट में फ्लो मीटर लगाए जाए और पानी की नियमित और व्यापक गुणवत्ता जांच हो। बिना ट्रीटमेंट पानी की आपूर्ति पर तुरंत रोकी जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि इन सुधारों के बिना दिल्ली में सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करना मुश्किल होगा।

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