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Tuesday, April 7, 2026
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Sheesh Mahal Controversy: केजरीवाल के ‘शीश महल’ पर भ्रष्टाचार की जांच शुरू, CVC ने दिए जांच के आदेश

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सरकारी आवास के नवीनीकरण में कथित भ्रष्टाचार को लेकर केंद्रीय सतर्कता आयोग CVC ने विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।

नई दिल्ली,रफतार डेस्क। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सरकारी आवास के नवीनीकरण में कथित भ्रष्टाचार को लेकर केंद्रीय सतर्कता आयोग CVC ने विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। इस मामले की जांच केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) करेगा, जो निर्माण कार्यों में हुई अनियमितताओं की समीक्षा करेगा।

कैसे शुरू हुआ Sheesh Mahal विवाद?

भाजपा विधायक विजेंद्र गुप्ता ने CVC से शिकायत की थी कि केजरीवाल के सरकारी बंगले का निर्माण और नवीनीकरण अवैध रूप से किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस सरकारी आवास के निर्माण में भवन नियमों का उल्लंघन हुआ और FAR मानदंडों की अनदेखी की गई। साथ ही, राजपुर रोड स्थित प्लॉट नंबर 45 और 47 को भी इसमें शामिल कर लिया गया, जो पहले वरिष्ठ अधिकारियों और न्यायाधीशों के सरकारी आवास थे।

CVC ने जांच के आदेश कब दिए?

CVC ने 16 अक्टूबर 2024 को इस शिकायत को औपचारिक रूप से दर्ज किया और 5 नवंबर 2024 को इसकी पुष्टि की। इसके बाद CPWD के मुख्य सतर्कता अधिकारी CVO को मामले की जांच करने का निर्देश दिया गया। 5 दिसंबर 2024 को CPWD ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट CVC को सौंप दी। 13 फरवरी 2025 को इस रिपोर्ट की समीक्षा के बाद CVC ने CPWD को और गहराई से जांच करने का आदेश दिया। 21 अक्टूबर 2024 को विजेंद्र गुप्ता ने CVC को एक और शिकायत दी, जिसमें मुख्यमंत्री आवास के नवीनीकरण और आंतरिक सजावट पर हुए अत्यधिक खर्च को लेकर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया गया। उनका कहना था कि टैक्सपेयर्स के पैसों से करोड़ों रुपये खर्च किए गए, जो सामान्य बजट से कहीं अधिक थे। CVC ने 5 नवंबर 2024 को इस शिकायत पर संज्ञान लिया और CPWD के चीफ विजिलेंस ऑफिसर को जांच के निर्देश दिए। 24 दिसंबर 2024 को CPWD ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट सौंपी। 13 फरवरी 2025 को इस रिपोर्ट की समीक्षा के बाद CVC ने CPWD को विस्तृत जांच करने और नवीनीकरण में खर्च की गई राशि की वैधता की पुष्टि करने को कहा।

क्या होगी आगे की कार्रवाई?

अब CPWD इस मामले की विस्तृत जांच करेगा और रिपोर्ट तैयार कर CVC को सौंपेगा। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। अगर भ्रष्टाचार के आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है।

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