नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। दिल्लीवालों के लिए खतरे की एक और बड़ी घंटी बज चुकी है। सांस लेने में जहरीली हवा से जूझ रही राजधानी अब पीने के पानी को लेकर भी गंभीर संकट में फंसती नजर आ रही है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली का ग्राउंड वॉटर अब सिर्फ फेफड़ों के लिए नहीं, बल्कि लीवर, किडनी और दिमाग के लिए भी बड़ा खतरा बन चुका है। सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड (CGWB) की रिपोर्ट ने यह चौंकाने वाला खुलासा किया है कि दिल्ली के भूजल में नाइट्रेट की मात्रा खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है, जो सीधे इंसानी सेहत पर हमला कर रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर से लगातार बनी जहरीली हवा के बीच अब पानी भी ‘धीमा जहर’ साबित हो रहा है। CGWUB ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के सामने पेश हलफनामे में बताया कि दिल्ली में लिए गए 20 प्रतिशत से ज्यादा भूजल नमूनों में नाइट्रेट की मात्रा तय सुरक्षित सीमा से कहीं अधिक पाई गई है। जहां पीने के पानी में नाइट्रेट की अधिकतम सुरक्षित सीमा 45 mg/l मानी जाती है, वहीं कुछ इलाकों में यह स्तर 994 mg/l तक दर्ज किया गया, जो करीब 22 गुना ज्यादा है।
सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि दिल्ली के 11 में से 7 जिले इस जहरीले पानी की चपेट में आ चुके हैं। नई दिल्ली, उत्तरी, उत्तर-पश्चिम, दक्षिण, दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम और पश्चिमी दिल्ली के कई इलाकों में भूजल पीने लायक नहीं रह गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि नाइट्रेट युक्त पानी लंबे समय तक पीने से कैंसर, थायराइड की बीमारी, किडनी और लीवर डैमेज जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
नवजात शिशुओं के लिए यह खतरा और भी जानलेवा है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि नाइट्रेट की अधिक मात्रा से बच्चों में ‘ब्लू बेबी सिंड्रोम’ हो सकता है, जिसमें शरीर तक ऑक्सीजन पहुंचना कम हो जाता है और बच्चे की त्वचा नीली पड़ने लगती है। डॉक्टरों के मुताबिक, यह स्थिति कई बार जानलेवा भी साबित हो सकती है।
दिल्ली ही नहीं, बल्कि देश के कई हिस्सों में हालात चिंताजनक हैं। आंध्र प्रदेश में नाइट्रेट का स्तर सबसे ज्यादा खतरनाक पाया गया, जहां एक जगह यह 2,296 mg/l तक पहुंच गया। वहीं राजस्थान में लगभग आधे भूजल नमूने सुरक्षित सीमा से बाहर मिले हैं। आंकड़े बताते हैं कि 2017 में जहां 359 जिलों में नाइट्रेट की समस्या थी, अब यह बढ़कर 440 जिलों तक फैल चुकी है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि बारिश के बाद हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ जाते हैं। खेतों में इस्तेमाल होने वाले नाइट्रोजन युक्त उर्वरक और गंदगी बारिश के पानी के साथ जमीन में समा जाती है, जिससे मानसून के बाद नाइट्रेट प्रदूषण और बढ़ जाता है। ऐसे में दिल्लीवालों के लिए साफ पानी अब सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।





