back to top
22.1 C
New Delhi
Saturday, April 11, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

’55 मिनट ही वॉक कर सका, सुबह तक परेशान रहा’ दिल्ली-NCR के प्रदूषण पर CJI सूर्यकांत ने जताई गंभीर चिंता

दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण पर CJI सूर्यकांत ने गंभीर चिंता जताते हुए बताया कि खराब हवा की वजह से उन्हें वॉक के बाद भी स्वास्थ्य दिक्कतें हुईं। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में ये सुझाव दिया है।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की गंभीर होती स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने चिंता व्यक्त की है। बुधवार (26 नवंबर, 2025) को सुप्रीम कोर्ट में वोटर लिस्ट के स्पेशल इन्टेंसिव रिविजन (SIR) पर सुनवाई के दौरान, प्रदूषण का मुद्दा उठा, जिस पर चीफ जस्टिस ने अपना निजी अनुभव साझा किया।जस्टिस सूर्यकांत ने बताया कि प्रदूषण के कारण उन्हें अपने दैनिक वॉक में भारी परेशानी हो रही है।

”55 मिनट की वॉक के बाद सुबह तक असुविधा”

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कोर्ट में कहा कि प्रदूषण के चलते उन्हें कल शाम को वॉक करने के बाद बहुत असुविधा महसूस हुई। अपने निजी अनुभव शेयर करते हुए उन्होंने कहा कि, इससे पहले भी वह दो दिन वॉक पर नहीं जा पाए थे। कल शाम उन्होंने सिर्फ 55 मिनट ही वॉक की और उन्हें सुबह तक परेशानी रही।

चीफ जस्टिस ने यह बातें तब कहीं जब SIR मामले की सुनवाई के लिए पेश हुए चुनाव आयोग के सीनियर एडवोकेट राकेश द्विवेदी ने प्रदूषण का हवाला देते हुए 2 दिसंबर की सुनवाई में ऑनलाइन शामिल होने की अनुमति मांगी।इस बात को सिब्बल ने किया समर्थन, याचिकाकर्ता पक्ष के सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने भी प्रदूषण की गंभीर स्थिति से सहमति जताते हुए सुझाव दिया कि,कोर्ट को फिलहाल ऑनलाइन मोड में ही काम करना चाहिए।चीफ जस्टिस ने आश्वासन दिया कि वह बार एसोसिएशन और अन्य जजों से इस विषय पर विचार-विमर्श करेंगे और सबकी सहमति से कोई निर्णय लिया जाएगा।

दिल्ली-NCR में हवा ‘बहुत खराब’

दिल्ली-एनसीआर में पिछले 12 दिनों से हवा की क्वालिटी लगातार ‘बहुत खराब’ श्रेणी (AQI 350+) में बनी हुई है, जिसके चलते लोगों को साँस लेने में गंभीर दिक्कतें आ रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने आज एसआईआर पर सुनवाई को दो हिस्सों में बाँट दिया है एक मुख्य मुद्दा (वैधता पर सुनवाई) और दूसरा राज्यों के स्थानीय मसले।

राज्य सुनवाई की तारीख

केरल 2 दिसंबर

तमिलनाडु 4 दिसंबर

पश्चिम बंगाल 9 दिसंबर

कोर्ट ने आश्वासन दिया है कि अगर आवश्यक हुआ तो वह ड्राफ्ट रोल के प्रकाशन की तारीख आगे बढ़ा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत द्वारा व्यक्त की गई चिंता के बाद, केंद्र और दिल्ली सरकार ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) को और सख्त करते हुए प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए निम्नलिखित बड़े कदम उठाए हैं। जिसमें कुछ इस प्रकार है। 

1. 50% कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य

हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ से ‘गंभीर’ श्रेणी में बने रहने के कारण CAQM (वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग) के निर्देश पर यह कड़ा कदम उठाया गया है। 

सरकारी और निजी कार्यालयों को अधिकतम 50% कर्मचारियों की उपस्थिति के साथ काम करने का आदेश दिया गया है। शेष कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम (WFH) अनिवार्य कर दिया गया है।यह नियम परिवहन से जुड़े उत्सर्जन को कम करने के लिए लागू किया गया है। आपातकालीन सेवाओं (अस्पताल, बिजली, पानी, सफाई) को इससे छूट दी गई है।

2. निर्माण और विध्वंस (C&D) गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध

गैर-ज़रूरी निर्माण और विध्वंस (Construction and Demolition) गतिविधियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।

धूल नियंत्रण के मानदंडों का उल्लंघन करने वाली साइटों पर ₹5 लाख तक का भारी जुर्माना लगाया जा रहा है। ऊंची इमारतों पर एंटी-स्मॉग गन लगाई गई हैं और धूल को नियंत्रित करने के लिए पानी के छिड़काव को बढ़ाया गया है।

3. BS-III और BS-IV वाहनों पर सख्त पाबंदी

परिवहन से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए, दिल्ली-एनसीआर के कई जिलों में BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल चार-पहिया वाहनों के चलने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। PMO (प्रधानमंत्री कार्यालय) ने भी स्थिति पर संज्ञान लेते हुए BS-I और BS-III श्रेणी की पुरानी गाड़ियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

4. ऑफिस टाइमिंग में बदलाव (Staggered Timings)

पीक आवर्स में ट्रैफिक जाम और उत्सर्जन को कम करने के लिए सरकारी और नगर निगम के कार्यालयों के समय में बदलाव (Staggered Timings) को लागू किया गया है।

उदाहरण: MCD कार्यालय 8:30 AM से 5:00 PM और दिल्ली सरकार के कार्यालय 10:00 AM से 6:30 PM तक संचालित हो रहे हैं।

5. सार्वजनिक परिवहन और धूल नियंत्रण पहल

दिल्ली नगर निगम (MCD) ने सड़कों पर जमा धूल को कम करने के लिए नई मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें (MRSM) खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।लोगों को निजी वाहनों का उपयोग न करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु CNG/इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाने और मेट्रो की फ्रीक्वेंसी (आवृत्ति) बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

ये सभी कदम वर्तमान में लागू GRAP-III के तहत उठाए गए हैं, जिसके तहत अब पहले से तय GRAP-IV के कई कड़े प्रतिबंधों को भी शामिल कर लिया गया है ताकि हवा को जल्द से जल्द साफ किया जा सके।

Advertisementspot_img

Also Read:

सुप्रीम कोर्ट ने NCERT कंटेंट पर जताई थी आपत्ति, CJI ने बताई साजिश, 11 मार्च को होगी सुनवाई

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। देश की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 8 की एक पुस्तक में न्यायपालिका को लेकर प्रकाशित कथित आपत्तिजनक सामग्री पर कड़ा रुख...
spot_img

Latest Stories

डार्क लिप्स से मिनटों में पाएं छुटकारा, घर पर अपनाएं ये आसान टिप्स

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। आज के समय में हर...

कौन हैं शनिदेव? क्यों कहते हैं इनको न्याय का देवता, जानिए इनसे जुड़ी सारी जानकारी

नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। शनिवार के दिन शनिदेव की...
⌵ ⌵ ⌵ ⌵ Next Story Follows ⌵ ⌵ ⌵ ⌵