नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । दिल्ली में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब हो गई है, जहां कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 के पार पहुंच चुका है। यह ‘जानलेवा’ स्तर पर पहुंचने से राजधानी में एक बार फिर गंभीर पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी का खतरा मंडरा रहा है। विशेषज्ञों ने सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
सर्दी की धुंध ने दिल्ली को घेर लिया है, जिससे करोड़ों लोग जहरीली हवा में सांस ले रहे हैं। एम्स के डॉक्टरों के मुताबिक, यह प्रदूषण जीवन के हर चरण में नुकसान पहुंचा रहा है। अस्पतालों में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ने से स्वास्थ्य प्रणाली पर दबाव बढ़ गया है।
अस्पतालों में मरीजों की भीड़ इस बात का प्रमाण है कि स्थिति गंभीर हो गई है। एम्स में हफ्ते में दो बार होने वाली ओपीडी में भी भारी संख्या में मरीज आ रहे हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि हेल्थ इमरजेंसी क्या होती है और सरकार इसे कब लागू करती है।
क्या होती है हेल्थ इमरजेंसी?
हेल्थ इमरजेंसी तब घोषित की जाती है जब कोई गंभीर घटना या खतरा सामने आए, जिससे सामान्य स्वास्थ्य प्रणाली उसे प्रभावी ढंग से नियंत्रित नहीं कर पाती और इसका व्यापक असर देखने को मिलता है। ऐसे हालात में सरकार को तात्कालिक कदम उठाने की जरूरत होती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हेल्थ इमरजेंसी की स्थिति तीन प्रमुख मानदंडों पर आधारित होती है। पहला, समस्या गंभीर, अचानक या असामान्य होनी चाहिए। यह एक तरह का अलर्ट है, जिसमें सरकार को यह मानना पड़ता है कि हालात सामान्य नहीं रहे और तुरंत कार्रवाई की आवश्यकता है।
इसको कब घोषित करती है सरकार?
हेल्थ इमरजेंसी हमेशा नहीं घोषित की जाती, इसके लिए कुछ विशेष नियम और कानून होते हैं। इसे केवल तब घोषित किया जाता है जब स्थिति गंभीर हो। इससे पहले, हालात इस तरह हो जाते हैं कि स्वास्थ्य प्रणाली पर अत्यधिक दबाव पड़ने लगता है, अस्पतालों में भारी भीड़ होती है, और जीवनदायिनी सेवाओं का संचालन प्रभावित होने लगता है।
जब स्थिति इस तरह की हो: –
संक्रमण तेजी से फैल रहा हो, अस्पतालों में मरीजों की भीड़ अचानक बढ़ जाए, सामान्य इलाज की व्यवस्था टूटने लगे, लोगों की जान को सीधा खतरा हो, और प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच जाए, तब सरकार इसे आपात स्थिति मानकर तत्काल कार्रवाई करने का फैसला करती है और जरूरी कदम उठाए जाते हैं।
हेल्थ इमरजेंसी के दौरान सरकार के क्या होते है कदम: –
अस्पतालों में अतिरिक्त बेड की व्यवस्था: मरीजों की बढ़ती संख्या के लिए बेड बढ़ाए जाते हैं।
मेडिकल स्टाफ, एंबुलेंस और सुविधाएं बढ़ाना: स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता बढ़ाई जाती है।
स्कूलों, दफ्तरों या मार्केट पर अस्थायी फैसले: कुछ स्थानों पर अस्थायी बंद या कड़े दिशा-निर्देश लागू किए जाते हैं।
लोगों को घर के अंदर रहने की सलाह: सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए घर पर रहने के लिए कहा जाता है।
तुरंत मेडिकल संसाधन उपलब्ध कराना: अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में तत्काल चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं।
प्रदूषण हुआ तो कुछ गतिविधियों पर रोक: प्रदूषण के उच्च स्तर पर कुछ गतिविधियों पर रोक लगाई जाती है, जैसे निर्माण कार्य या वाहन चलाने पर प्रतिबंध।
सभी उपायों का मकसद स्थिति को काबू में करना
इन सभी उपायों का मकसद स्थिति को काबू में करना और लोगों की सेहत को बचाना है। अगर आसान भाषा में कहें, तो जब किसी बीमारी या स्वास्थ्य से जुड़ा खतरा पूरे शहर या राज्य में फैलकर लोगों की सेहत पर बुरा असर डालने लगे और सामान्य व्यवस्था उसे संभाल न पाए, तब हेल्थ इमरजेंसी लगाई जाती है।





