नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बिहार में नई सरकार के गठन से पहले राजनीतिक हलचल तेज है। इस बार सत्ता संघर्ष सिर्फ मुख्यमंत्री के पद तक सीमित नहीं, बल्कि विधानसभा अध्यक्ष यानी स्पीकर की कुर्सी को लेकर भी बड़ा खेल चल रहा है। राजनीतिक जानकार साफ कह रहे है। जिसका स्पीकर, उसका खेल।
JDU और BJP में टकराव: स्पीकर का पद किसे?
वर्तमान में स्पीकर पद BJP के पास है, लेकिन इस बार JDU भी इसे किसी कीमत पर छोड़ना नहीं चाहती। JDU का तर्क विधान परिषद के सभापति का पद BJP के पास है, इसलिए विधानसभा स्पीकर JDU को मिलना चाहिए। BJP का दावा: सीएम की कुर्सी JDU के पास है, तो स्पीकर BJP का हक बनता है। इस बहस से साफ है कि दोनों दल इस पद की ताकत को समझते हैं और हाथ से जाने नहीं देना चाहते।
स्पीकर के अधिकार
सदन की कार्यवाही संचालित करना विपक्ष के नेता को मान्यता देना वोटिंग में किसका वोट गिना जाएगा, यह तय करना अनुशासनहीन विधायकों पर कार्रवाई करना गुप्त मतदान की अनुमति देना दल-बदल कानून (1985) के तहत स्पीकर किसी भी विधायक को अयोग्य करार दे सकते हैं। और गठबंधन सरकार में यही शक्ति सबसे बड़ा हथियार बन जाती है। बिहार की राजनीति में जोड़-तोड़ और विधायकों की टूट-फूट नया नहीं है। ऐसे में अगर स्पीकर अपने दल का हो तो सरकार मजबूत अगर स्पीकर विपक्ष के करीबी हो तो सरकार कमजोर यानी गठबंधन चलाना है तो स्पीकर और सीएम का तालमेल जरूरी।
क्यों लगी है BJP और JDU में होड़?
JDU अपने विधायकों को सुरक्षित रखना, BJP के दबाव को रोकना BJP भविष्य की राजनीतिक रणनीति और सरकार पर पकड़ बढ़ाना दोनों दल जानते हैं कि आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में उतार-चढ़ाव हो सकता है। इसलिए आज ही कुर्सी पर कब्ज़ा ज़रूरी। स्पीकर का फैसला ही तय करेगा कि नई सरकार कितनी स्थिर रहेगी और किसके हाथ में असली खेल होगा। बिहार की सियासत फिलहाल एक ही सवाल पर अटकी है क्योंकि जिसका स्पीकर, उसकी सरकार… और उसका खेल!





