बेगूसराय, 09 मार्च (हि.स.)। माता एवं शिशु को पोषण सुनिश्चित कराना हमेशा से ही एक चुनौती रही है। माता एवं उसके शिशु को कुपोषण की समस्या से बचाने के लिए बेहतर पोषण पर ध्यान देना अति आवश्यक है। संतुलित पोषण के आभाव में बच्चे बौनापन के शिकार हो सकते हैं, इसलिए शिशु के जन्म से ही उनके पोषण का ख्याल रखना आवश्यक है। नवजात शिशु के जन्म के आधा घंटा के भीतर स्तनपान, छह महीने तक केवल स्तनपान एवं छह माह के बाद स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार की शुरुआत करना अति आवश्यक है। बेगूसराय सदर प्रखंड के बाल विकास कार्यक्रम पदाधिकारी (सीडीपीओ) पूजा रानी ने मंगलवार कोL बताया कि सही और संतुलित पोषण नहीं मिलने से बच्चे बौनापन के शिकार हो जाते हैं। इसीलिए प्रसव के आधा घंटे के भीतर ही शिशु को स्तनपान कराना चाहिए। इससे बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। जबकि शिशु को जन्म के छह महीने तक बच्चे को केवल स्तनपान ही कराना चाहिए। इस दौरान ऊपर से पानी भी शिशु को नहीं देना चाहिए। छह माह के बाद स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार जरुरी- सीडीपीओ पूजा रानी ने बताया कि छह महीने के बाद बच्चों में शारीरिक एवं मानसिक विकास तेजी से शुरू हो जाता है। इसलिए छह माह के बाद सिर्फ स्तनपान से आवश्यक पोषक तत्त्व बच्चे को नहीं मिल पाता है। इसलिए छ्ह माह के बाद अर्ध ठोस आहiर जैसे खिचड़ी, गाढ़ा दलिया, पका हुआ केला एवं मूंग का दाल दिन में तीन से चार बार जरूर देना चाहिए। इसके साथ ही दो साल तक अनुपूरक आहार के साथ माँ का दूध भी पिलाते रहना चाहिए, ताकि शिशु का पूर्ण शारीरिक एवं मानसिक विकास हो पाए। उन्होंने बताया कि उम्र के हिसाब से ऊंचाई में वांछित बढ़ोतरी नहीं होने से शिशु बौनापन का शिकार हो जाता है। इसे रोकने के लिए शिशु को स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार जरुर देना चाहिए। पूजा रानी ने बताया पहले एक हजार दिन नवजात के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है जो कि महिला के गर्भधारण करने से ही प्रारम्भ हो जाती हैं। आरंभिक अवस्था में उचित पोषण नहीं मिलने से बच्चों का शारीरिक एवं बौद्धिक विकास भी अवरुद्ध हो सकता है, जिसकी भरपाई बाद में नहीं हो पाता है। शिशु के जन्म के बाद पहले वर्ष का पोषण बच्चों के मस्तिष्क और शरीर के स्वस्थ विकास और प्रतिरोधकता बढ़ाने में बुनियादी भूमिका निभाता है। शुरूआती के एक हजार दिनों में बेहतर पोषण सुनिश्चित होने से मोटापा और जटिल रोगों से भी बचा जा सकता है। उन्होंने बताया कि गर्भावस्था के दौरान महिला को प्रतिदिन के भोजन के साथ आयरन और फॉलिक एसिड एवं केल्सियम की गोली लेना भी जरुरी है। एक गर्भवती महिला को अधिक से अधिक आहार सेवन में विविधता लानी चाहिए। गर्भावस्था में बेहतर पोषण शिशु को भी स्वस्थ रखने में मदद करता है। गर्भावस्था के दौरान आयरन और फॉलिक एसिड के सेवन से महिला एनीमिया से सुरक्षित रहती है एवं इससे प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्त स्त्राव से होने वाली जटिलताओं से भी बचा जा सकता है। वहीं, कैल्शियम का सेवन भी गर्भवती महिलाओं के लिए काफी जरुरी है। इससे गर्भस्थ शिशु के हड्डी का विकास पूर्ण रूप से हो पाता है एवं जन्म के बाद हड्डी संबंधित रोगों से शिशु का बचाव भी होता है। हिन्दुस्थान समाचार/सुरेन्द्र/चंदा




