आरा,27 मई(हि.स.)। राजभवन के निर्देश पर वीर कुंवर सिंह विवि आरा के कुलपति पर लगाये गए आरोपो की जांच करने आरा पहुंचे ललित नारायण मिथिला यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. एसपी सिंह की योग्यता पर उठ रहा सवाल विवि के राजनैतिक गलियारों में अब चर्चा का विषय बना हुआ है। पिछले दिनों राजभवन के निर्देश पर कुलपति प्रो.डीपी तिवारी पर लगाये गए आरोपो की जांच करने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति आरा पहुंचे थे लेकिन उन्हें यह कहकर की आप जूनियर होकर सीनियर कुलपति के मामले की जांच करने योग्य नही है,जांच के मामलों को स्थगित कर दिया गया था और उन्हें जानकारी दे दी गई थी कि इस बात से राजभवन को अवगत करा दिया गया है। वीर कुंवर सिंह विवि आरा के कुलपति प्रो.डीपी तिवारी ने तब प्रो.सिंह के इस बात पर भी आपत्ति जताई थी कि राजभवन ने जिन लोगो के आवेदन को समर्पित कर जांच का जिम्मा उन्हें दिया था वे उससे अलग जाकर नए नए लोगो के शिकायती आवेदन एकत्रित कर उनसे बयान दर्ज करा रहे थे।इस बात को लेकर मामला बढ़ गया और प्रो.सिंह के कनीय होकर वरीय कुलपति की जांच के योग्य नही होने को लेकर राजभवन को पत्र भेज दिए जाने की बात की जानकारी दी गई।इसके बाद जांच को स्थगित कर राजभवन से पहुंची टीम को बैरंग वापस लौटना पड़ा। अब ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एसपी सिंह की प्रोफेसर के पद पर प्रोन्नति और साथ ही दस वर्षों का कार्यानुभव का मामला विवि की राजनैतिक गलियारों में तैरने लगा है। चर्चा है कि डॉ. सिंह प्रोफेसर नही हैं और उन्हें कुलपति बना दिया गया है। सूत्र बताते हैं कि उत्तर प्रदेश में भी उन्हें कुलपति नियुक्त किया गया था और इलाहाबाद हाई कोर्ट के लखनऊ बेंच में एक सिविल अपील संख्या 6831/2013 के मामले में सुनवाई भी हुई किन्तु उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से नियमो का हवाला देकर कुलपति के पद पर डॉ. सिंह की नियुक्ति को वैध ठहरा दिया गया। बिहार के ललित नारायण मिथिला विवि में डॉ. सिंह की जब कुलपति के पद पर नियुक्ति हुई तब कथित कुलपति की नियुक्ति के लिए प्रोफेसर के पद पर होते हुए दस वर्षों के जरूरी कार्यानुभव को दरकिनार किया गया। ललित नारायण मिथिला विवि में इनकी नियुक्ति 19 सितंबर 2020 को हुई थी। बाद में राजभवन द्वारा इन्हें कथित पाटलिपुत्र यूनिवर्सिटी,मौलाना मजहरुल हक अरबिक एंड पर्सियन यूनिवर्सिटी और आर्यभट्ट नॉलेज यूनिवर्सिटी में कुलपति का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। सूत्र बताते हैं कि जब डॉ. एसपी सिंह की प्रोफेसर के पद पर कथित प्रोन्नति ही नही हुई है और न ही इनका प्रोफेसर के पद पर रहते दस वर्षों का कार्यानुभव ही है तब कैसे सर्च कमिटी ने इन्हें कुलपति के योग्य मानते हुए कुलपति बनाने की पहल की।राजभवन ने बिना प्रोफेसर रहते इन्हें कुलपति कैसे नियुक्त किया। अब यही सवाल विवि के राजनैतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। हिन्दुस्थान समाचार/सुरेन्द्र
कुलपति की जांच को ले आरा पहुंची जांच समिति के सदस्य की योग्यता पर उठे सवाल,बगैर प्रोफेसर के कुलपति बनने की चर्चा से गरमाई विवि की राजनीति
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