नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बिहार के नवादा जिले के रोह थाना क्षेत्र में 35 वर्षीय मोहम्मद अतहर हुसैन की मॉब लिंचिंग की घटना ने पूरे इलाके को सकते में डाल दिया। 5 दिसंबर की रात डुमरी गांव से लौटते समय अतहर को भट्टा गांव के पास 6-7 नशे में धुत युवकों ने रोक लिया। भीड़ ने घर का पता और नाम पूछने के बाद जैसे ही पता चला कि उनका नाम मोहम्मद अतहर हुसैन है, तो हमला कर दिया। उन्हें साइकिल से उतारकर पैसों की लूट के साथ हाथ-पैर बांधकर एक कमरे में घसीटा गया। परिजनों का आरोप है कि वहां उनके साथ अमानवीय यातनाएं की गईं-पैंट खोलकर धर्म देखा गया, करंट लगाया गया, हाथ और उंगलियां तोड़ी गईं, कान काटे गए और शरीर पर गर्म लोहे की रॉड से चोटें दी गईं।
इलाज के दौरान मौत
घटना के बाद अतहर हुसैन को नवादा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। 7 दिसंबर को उन्होंने अस्पताल में एबीपी संवाददाता को कांपती आवाज में पूरी आपबीती सुनाई थी। उन्होंने बताया कि पुलिस ने उन्हें बचाया और इलाज कराया, लेकिन जख्म इतने गहरे थे कि शरीर साथ नहीं दे सका। शुक्रवार देर रात 12 दिसंबर को बिहारशरीफ सदर अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पोस्टमॉर्टम नालंदा सदर अस्पताल में फॉरेंसिक टीम और मजिस्ट्रेट की निगरानी में संपन्न हुआ।
पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी
रोह थाना प्रभारी रंजन कुमार ने बताया कि इस मामले में चार आरोपी-सोनू कुमार, रंजन कुमार, सचिन कुमार और श्री कुमार को गिरफ्तार किया गया है, जबकि अन्य आरोपी अभी फरार हैं। परिजनों ने कार्रवाई को नाकाफी बताया और न्याय की मांग करते हुए कहा कि उन्हें सिर्फ अपने पति के हत्यारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई चाहिए। बेटे इस्तेखार हुसैन ने झुकी नजरों से कहा कि प्रशासन और सरकार से उनकी सिर्फ यही गुहार है कि उनके पिता के हत्यारों को सजा मिले।
मॉब लिंचिंग पर बढ़ते सवाल
इस भयावह घटना ने नवादा और बिहार में बढ़ती मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। धर्म के नाम पर हिंसा की यह कहानी सामाजिक और प्रशासनिक चुनौती बन चुकी है। परिजनों का दर्द और न्याय की मांग इस बात की ओर इशारा करती है कि केवल गिरफ्तारी से मामले की गहराई नहीं मिटाई जा सकती, बल्कि समाज में धार्मिक सहिष्णुता और सुरक्षा की आवश्यकता को बल देना होगा।





