कांकेर, 14 जून (हि.स.)। जिले के पुलिस थाना लोहत्तर के थाना प्रभारी के द्वारा वहां तैनात आदिवासी वर्ग के आरक्षक को चप्पल से पीटने एवं जातिगत गाली-गलौज करने के मामले को राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग ने संज्ञान में लिया है। इस बाबत् पीडि़त पक्ष के द्वारा आयोग में न्याय हेतु गुहार भी लगाया गया है। रविवार को आयोग के नाम पर एक शिकायत पत्र आयोग के सदस्य नितिन पोटाई को सौंपकर कार्रवाई करने की मांग की है। राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य नितिन पोटाई ने सोमवार को इस मामले में कहा कि थाना प्रभारी जैसे महत्वपूर्ण पद पर कार्य करते हुए किसी अधिकारी के द्वारा आदिवासी आरक्षक को चप्पलों से पीटना एवं जातिगत गाली गलौज करना शोभा नहीं देता है। इस घटना की जितनी भी निंदा की जाये वह कम है। यह मामला आदिवासी उत्पीड़न का मामला है। पोटाई ने कहा कि भारत में हर व्यक्ति को सम्मान पूर्वक जीने का अधिकार है, चाहे वह नौकरी पेशा व्यक्ति हो या फिर आम नागरिक यदि पुलिस के किसी कर्मचारी के द्वारा ड्यूटी के दौरान थाना में गणना के वक्त सही समय पर नहीं पहुचते है, तो उन्हे लिखित में कारण बताओ नोटिस दिया जाना था अथवा पुलिस नियम के अनुसार विधिवत कार्रवाई करना था। इसके विपरीत लोहत्तर थाना में पदस्थ थाना प्रभारी महेश के द्वारा पीड़ित आरक्षक का बिना पक्ष जाने न केवल आदिवासी आरक्षक को चप्पलों से पीटा गया बल्कि जातिगत गाली-गलौज भी दी गई। सहायक आरक्षक के साथ थाना प्रभारी जातिगत गाली-गलौज करने का एक ऑडियो भी वायरल हुआ था, सहायक आरक्षक संतोष दुग्गा ने आरोप लगाया है कि थाना प्रभारी महेश साहू ने तकरीबन दो महीने पहले ड्यूटी में देरी से पहुंचने को लेकर फोन पर पहले गाली-गलौज की साथ ही थाना पहुंचने पर चप्पल से उसकी पिटाई की। घटना का वीडियो उसके साथियों ने बना लिया था। हालांकि डर के कारण इसे वरिष्ठ अधिकारियों तक नहीं पहुंचाया जा सका। हिन्दुस्थान समाचार/राकेश पांडे




