नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति के लिए अपनी पहचान रखनेवाला अंतरराष्ट्रीय कृष्ण भक्त संघ यानी इस्कॉन के बारे में आम जन की भी इन दिनों जानने की जिज्ञासा बढ़ गई है। गूगल जैसे तमाम सर्च इंजन में अलग से लोग इस संगठन के बारे में जानना चाहते हैं, दरअसल, ऐसा होने के पीछे वजह बनी है बांग्लादेश में इसके सबसे बड़े चेहरे चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी की गिरफ्तारी का होना। जब उन्हें गिरफ्तार किया गया तब वह ढाका से चटगांव जा रहे थे। बांग्लादेशी पुलिस की कार्रवाई के बाद हिंदुओं में गुस्सा है और वे यूनुस सरकार की इस कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं ।
चिन्मय दास बांग्लादेश में इस्कॉन के साथ हिंदू धर्म का सबसे बड़ा चेहरा हैं। उन्होंने वहां इस्कॉन का खूब प्रचार-प्रसार किया, वह भी ऐसे समय में जब बांग्लादेश में हिंदू आबादी घट रही है। स्वभाविक है कि सत्ता परिवर्तन होने के बाद नई बनी बांग्लादेशी हिंदुओं को जागरूक करने की इस्कॉन की कोशिशें मोहम्मद यूनुस सरकार को पसंद नहीं आ रही हैं। इसलिए यहां उनके सत्ता में आने के बाद से हिंदुओं पर हमले बढ़े हैं। खासकर इस्कॉन उनके निशाने पर है। इस पर रोक लगाने की भी मांग यहां का कट्टर इस्लामिक संगठन जमियत-ए-इस्लामी करता है और सरकार उसका समर्थन करती दिख रही है। वास्तव में देखा जाए तो यही वह कारण है जिसके चलते नए लोग भी इस इस्कॉन संगठन के बारे में आज अधिक से अधिक जानना चाह रहे हैं।
विश्व भर में इस्कॉन यह मुख्य कार्य करता है
इस्कॉन एक ऐसी संस्था है जो लोगों को भगवान कृष्ण के प्रति उनके बताए रास्तों और उपदेशों के प्रति जागरूक करती है। इस्कॉन से जुड़े लोग भगवत गीता का संदेश घर-घर पहुंचाने का काम करते हैं। स्वामी श्रीप्रभुपाद ने 11 जुलाई 1966 को इसकी स्थापना की थी। दुनियाभर में उनके 1 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। यह हरे कृष्ण हरे राम नाम की धुन को संगीत के साथ लगातार प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं और दुनिया भर में इनके मंदिर आज प्रसिद्ध हैं। इसके यह मंदिर सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, पाकिस्तान जैसे देशों में भी हैं। दुनिया भर में इस्कॉन के करीब 108 मंदिर हैं। इसके कई केंद्र भी हैं। अकेले बांग्लादेश की बात करें तो यहां ढाका, राजशाही, चटगांव, सिलहट, रंगपुर, खुलना, बरिशाल, मैमनसिंह में इस्कॉन के प्रमुख मंदिर हैं।
बांग्लादेश में इस्कॉन को इसलिए बनाया जा रहा है निशाना
इस्कॉन मंदिर सिर्फ बांग्लादेश में ही नहीं बल्कि पाकिस्तान में भी हैं। लेकिन वे पाकिस्तान में उतने नहीं रहते जितने बांग्लादेश में हैं। एक समय बांग्लादेश की आबादी में लगभग 20% हिंदू हुआ करते थे, लेकिन अब उनकी संख्या घटकर 8% से भी कम रह गई है। दशकों तक उन्हें शेख हसीना की अवामी लीग पार्टी का समर्थन प्राप्त था लेकिन सत्ता परिवर्तन के साथ ही यहां पर हिंदुओं के भी बुरे दिन शुरू हो गए हैं। हिन्दू समुदाय के नेताओं का दावा है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को हमेशा दंगाइयों द्वारा निशाना बनाया जाता है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2013 से सितंबर 2021 के बीच हिंदू समुदाय पर कम से कम 3,679 हमले हुए हैं। शेख हसीना के निष्कासन के बाद, हिंदुओं को गंभीर स्थिति का लगातार यहां सामना करना पड़ रहा है। यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार अल्पसंख्यकों के साथ-साथ हसीना की पार्टी के कार्यकर्ताओं पर हमले रोकने में विफल रही है।
बांग्लादेश को इस्लामिक राज्य घोषित करने की उठी थी मांग
इस्कॉन पर हमला करने और उसे बांग्लादेश में कमजोर करने का बड़ा कारण यह भी है कि हाल ही में बांग्लादेश को इस्लामिक राज्य घोषित करने की मांग उठी थी। देश के अटॉर्नी जनरल एमडी असदुज़मान ने अदालत से कहा कि समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता उस देश की वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं जहां 90% आबादी मुस्लिम है। दूसरी ओर इस्कॉन और चिन्मय दास हैं जोकि लगातार यहां पर हिन्दुओं को जगा रहे हैं । इनके प्रयासों के बूते हिन्दुओं के साथ अन्य अल्पसंख्यकों में भी अपने धर्म के प्रति विश्वास बढ़ा है, वे कई दिक्कतों के बाद भी यहां अपने धर्म का पालन कर रहे हैं और यही बात बांग्लादेश में कट्टरपंथियों और इस्लामिक जिहादियों को रास नहीं आ रही है चूंकि सत्ता का परिवर्तन इन्हीं कट्टरपंथियों के बूते हुआ है, इसलिए यहां यूनुस सरकार इन्हीं जिहादी इस्लामिक कट्टरपंथियों के साथ खड़ी नजर आ रही है। बांग्लादेश में यूनुस सरकार को इस्कॉन का यह प्रचार-प्रसार पसंद नहीं आ रहा है और वह गुस्से में इसके खिलाफ कार्रवाई करती दिखाई दे रही है।




