नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । नेपाल में जारी राजनीतिक अस्थिरता और जनरेशन-Z के नेतृत्व में हो रहे प्रदर्शन के बीच एक बड़ा बदलाव सामने आया है। पहले जहां आंदोलनकारियों की ओर से पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की का नाम अंतरिम सरकार के मुखिया के तौर पर प्रस्तावित किया गया था, वहीं अब इंजीनियर कुलमान घीसिंग इस दौड़ में सबसे आगे माने जा रहे हैं। हालांकि शुरुआत में कार्की को व्यापक समर्थन मिला था, लेकिन जल्द ही उनके नाम पर आंदोलन के भीतर से ही विरोध उठने लगा। बताया जा रहा है कि कुछ युवा समूहों ने उनके अतीत और राजनीतिक निष्पक्षता पर सवाल उठाए। इसके बाद अब आंदोलनकारी समूहों का भरोसा कुलमान घीसिंग पर दिखने लगा है।
Gen Z गुट ने की प्रेस रिलीज जारी
नेपाल में अंतरिम सरकार के नेतृत्व को लेकर जारी सियासी सरगर्मी के बीच Gen Z आंदोलनकारी गुट की ओर से एक प्रेस रिलीज जारी की गई है, जिसमें पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री पद के लिए अयोग्य बताया गया है। बयान में साफ कहा गया है कि, “संविधान के अनुसार पूर्व जज और चीफ जस्टिस इस पद के लिए योग्य नहीं होते। साथ ही, 70 वर्ष की आयु पार कर चुकीं सुशीला कार्की Gen Z का प्रतिनिधित्व भी नहीं कर सकतीं। इसलिए उनका नाम अस्वीकृत किया गया है।”
प्रेस रिलीज में यह भी उल्लेख किया गया है कि बालेन्द्र शाह ने इस भूमिका में रुचि नहीं दिखाई, जबकि हर्क साम्पाङ के नेतृत्व की संभावना सीमित मानी जा रही है। ऐसे में आंदोलनकारी समूह ने इंजीनियर कुलमान घीसिंग को अंतरिम सरकार की कमान सौंपने का समर्थन किया है। बयान में उन्हें “देशभक्त”, “जनप्रिय” और “नेपाल को लोडशेडिंग से मुक्ति दिलाने वाला” व्यक्तित्व बताया गया है, जो सभी वर्गों के लिए स्वीकार्य हैं। Gen Z गुट के इस स्पष्ट रुख के बाद अब नेपाल की अंतरिम सरकार की कमान को लेकर तस्वीर धीरे-धीरे साफ होती दिखाई दे रही है।





