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संयुक्त राष्ट्र ने बिना सूचित सहमति के रोहिंग्याओं से जुड़े आंकड़े साझा किए

कोलकाता, 15 जून (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (यूएनएचसीआर) पर बांग्लादेश में रोहिंग्या शरणार्थियों से व्यक्तिगत जानकारी को गलत तरीके से एकत्र करने और साझा करने का आरोप लगाया गया है। कहा जा रहा है कि संभावित प्रत्यावर्तन के लिए शरणार्थियों को सत्यापित करने के लिए इसे म्यांमार के साथ साझा किया गया है। अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) ने आरोप लगाया है कि यूएनएचसीआर ने अपनी नीतियों की आवश्यकता के अनुसार पूर्ण डेटा प्रभाव मूल्यांकन नहीं किया और कुछ मामलों में म्यांमार के साथ अपना डेटा साझा करने के लिए शरणार्थियों की सूचित सहमति प्राप्त करने में विफल रहे, जहां वे इस वक्त रह रहे हैं। साल 2018 से यूएनएचसीआर ने बांग्लादेशी शिविरों में सैकड़ों हजारों रोहिंग्या शरणार्थियों को पंजीकृत किया है और ढाका सरकार ने उन्हें पहचान पत्र जारी किए हैं, जो आवश्यक सहायता और सेवाओं के लिए आवश्यक है। बांग्लादेश ने तब यूएनएचसीआर द्वारा एकत्रित जानकारी का ही उपयोग किया था, जब उसने संभावित प्रत्यावर्तन के लिए म्यांमार सरकार को शरणार्थी विवरण प्रस्तुत किया। जिसमें एनालॉग फोटोग्राफ, थंबप्रिंट इमेज और अन्य जीवन संबंधी डेटा शामिल थे। एचआरडब्ल्यू में संकट और संघर्ष निदेशक लामा फकीह ने कहा, बांग्लादेश में रोहिंग्या के साथ यूएनएचसीआर की डेटा संग्रह प्रथाएं एजेंसी की अपनी नीतियों के विपरीत थीं और शरणार्थियों को और जोखिम के लिए उजागर करती थीं। यूएनएचसीआर को केवल उस डेटा की अनुमति देनी चाहिए जिसे वह मूल देशों के साथ साझा करने के लिए एकत्र करता है। जिन्हें प्रतिभागियों से उचित रूप से सूचित सहमति से प्राप्त किया जाता है। 2016 के बाद से म्यांमार से 800,000 से अधिक रोहिंग्याओं ने सीमा पार होकर बाग्लादेश में पलायन किया है। रोहिंग्या आबादी के खिलाफ उत्पीड़न को लेकर म्यांमार सरकार की आलोचना भी की जा चुकी है। सितंबर, 2020 से मार्च, 2021 तक एचआरडब्ल्यू ने बांग्लादेश के कॉक्स बाजार में यूएनएचसीआर के साथ अपने पंजीकरण के अनुभवों के बारे में 24 रोहिंग्या शरणार्थियों का साक्षात्कार लिया और रोहिंग्या पंजीकरण में भाग लेने वाले 20 सहायता कर्मियों, विश्लेषकों, स्थानीय कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और वकीलों से बात की। एचआरडब्ल्यू ने फरवरी और अप्रैल में यूएनएचसीआर को विस्तृत प्रश्न और उसके शोध निष्कर्ष भेजे और 10 मई को संयुक्त राष्ट्र एजेंसी से प्रतिक्रियाएं प्राप्त कीं। यूएनएचसीआर ने किसी भी गलत काम या नीति के उल्लंघन से इनकार करते हुए कहा कि उसने डेटा एकत्र करने के अभ्यास के सभी उद्देश्यों को समझाया और सहमति प्राप्त की। एजेंसी ने कहा कि उसके डेटा संग्रह प्रयासों का उद्देश्य शरणार्थियों के लिए स्थायी समाधान खोजना था और इस दौरान किसी भी रोहिंग्या को जोखिम में नहीं डाला गया था। साल 2018 में बांग्लादेश सरकार ने यूएनएचसीआर के साथ एक संयुक्त पंजीकरण अभ्यास शुरू करके पिछले पंजीकरणों को पूरक करने की मांग की। सरकार का उद्देश्य शरणार्थियों के लिए स्मार्ट कार्ड नामक एक पहचान पत्र को शुरू करना है, जो उन्हें सहायता और सेवाएं प्राप्त करने की अनुमति देता है। सरकार ने प्रत्यावर्तन पात्रता आकलन के लिए म्यांमार को प्रस्तुत करने के लिए यूएनएचसीआर द्वारा एकत्र किए गए व्यक्तिगत डेटा को इकट्ठा करने की भी मांग की। यूएनएचसीआर ने कहा कि इससे शरणार्थियों के वापसी के अधिकार की रक्षा करने में मदद मिलेगी। एचआरडब्ल्यू के साथ एक जनवरी की बैठक में यूएनएचसीआर ने कहा कि फील्ड अधिकारियों ने रोहिंग्याओं से प्रत्यावर्तन पात्रता आकलन के लिए अपने आंकड़े साझा करने की अनुमति के लिए कहा था। उन्हें यह भी समझाया गया था कि जो लोग सहमत नहीं हैं, उन्हें भी स्मार्ट कार्ड जारी किया जाएगा। हालांकि, पंजीकरण के समय, यूएनएचसीआर के कर्मचारियों ने सार्वजनिक रूप से कहा कि डेटा प्रत्यावर्तन से संबंधित नहीं है। –आईएएनएस एएसएन/जेएनएस

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