नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज से दो दिवसीय भूटान दौरे पर हैं। रवाना होने से पहले उन्होंने X पर लिखा कि यह यात्रा भारत-भूटान मित्रता और साझेदारी को नई ऊंचाई देगी। मोदी के इस दौरे से दोनों देशों के बीच संबंधों में नई ऊर्जा और विश्वास का संचार होने की उम्मीद है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि दिल्ली में हुए ब्लास्ट के पीछे जिम्मेदारों को उनके अंजाम तक पहुंचाया जाएगा।
पिछले 11 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह चौथा भूटान दौरा है, जो दोनों देशों की मजबूत दोस्ती का प्रतीक है। यह यात्रा रणनीतिक दृष्टि से अहम मानी जा रही है। आइए जानें, भूटान भारत के लिए क्यों खास है और इस दो दिवसीय दौरे का मुख्य एजेंडा क्या है।
भूटान के राजा से मुलाकात
भूटान पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात राजा, चौथे राजा और प्रधानमंत्री त्शेरिंग तोबगे से होगी। दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत करने पर चर्चा होगी। इस दौरे का प्रमुख आकर्षण पुनात्संगछू-2 जलविद्युत परियोजना का उद्घाटन है, जो भारत-भूटान ऊर्जा सहयोग को नई ऊंचाई देगा।
भूटान के चौथे राजा का 70वां जन्मदिन
भूटान के चौथे राजा के 70वें जन्मदिन के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा खास महत्व रखता है। उन्होंने कहा, भारत-भूटान संबंध भरोसे, समझ और सद्भाव पर आधारित हैं। यह हमारी पड़ोसी नीति का आदर्श उदाहरण है। भारत इस सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रिश्ते को और गहराई देने का इच्छुक है।
”दोनों देशों की आस्था बौद्ध धर्म में”
भारत और भूटान का रिश्ता गहरे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक मूल्यों से जुड़ा है। दोनों देशों की आस्था बौद्ध धर्म से एक है। भारत ने भगवान बुद्ध के पिपरहवा अवशेष भूटान को भेंट किए हैं। भूटान में भारतीय संस्कृति, फिल्में और भोजन लोकप्रिय हैं, वहीं भारतीय बिना पासपोर्ट-वीजा वहां जा सकते हैं।
ग्लोबल पीस प्रेयर फेस्टिवल में भी लेंगे हिस्सा
भूटान में भारत के राजदूत संदीप आर्य के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी अपने दौरे के दौरान ग्लोबल पीस प्रेयर फेस्टिवल में भी भाग लेंगे। यह विश्व शांति और मानवता की खुशहाली के लिए समर्पित एक अनोखा आध्यात्मिक आयोजन है। भूटान सरकार के मुताबिक, इसमें भारतीय प्रधानमंत्री की उपस्थिति बेहद खास महत्व रखती है।
भारत के लिए क्यों खास है भूटान
भूटान भले छोटा हिमालयी देश हो, लेकिन रणनीतिक रूप से भारत के लिए अत्यंत अहम है। लगभग 7.5 लाख की आबादी वाला यह राष्ट्र भारत और चीन के बीच स्थित है, जिससे यह एक महत्वपूर्ण बफर जोन बनता है। साल 2017 के डोकलाम विवाद ने इसकी सामरिक अहमियत और बढ़ा दी थी।
2017 में चीन द्वारा भूटान के डोकलाम क्षेत्र में सड़क निर्माण की कोशिश को भारतीय सेना ने रोक दिया था, जिससे भूटान की भारत की सुरक्षा नीति में अहम भूमिका स्पष्ट हुई। भूटान की 75% बिजली जलविद्युत परियोजनाओं से बनती है, जिसे वह भारत को बेचता है। यही उसकी 80% विदेशी आय का स्रोत है। साथ ही, भूटान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन करता है।




