नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान यात्रा के दौरान कहा कि भारत और चीन को मिलकर काम करना चाहिए ताकि दुनिया की आर्थिक व्यवस्था स्थिर रह सके और एशिया में शांति कायम हो। उन्होंने साफ किया कि जब अमेरिका की टैरिफ नीतियों से वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ रही है, तब भारत और चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की साझेदारी और भी अहम हो जाती है।
मोदी का बड़ा संदेश
पीएम मोदी ने कहा- भारत और चीन एशिया की दो सबसे बड़ी ताकतें हैं। दोनों देशों का स्थिर और सकारात्मक रिश्ता पूरी दुनिया की शांति और स्थिरता के लिए जरूरी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों से बनी अनिश्चितता को देखते हुए भारत-चीन का सहयोग और भी अहम हो जाता है। यह संदेश ऐसे समय आया है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अमेरिका की प्रोटेक्शनिस्ट नीतियों और व्यापार युद्ध जैसी चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे माहौल में भारत और चीन का एकजुट होना न सिर्फ एशिया बल्कि पूरी दुनिया के लिए बड़ा संतुलन साबित हो सकता है।
पहलगाम हमले को लेकर चिंता
22 अप्रैल को हुए इस आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान गई थी। मोदी ने कहा कि इस हमले की जिम्मेदारी TRF (द रेजिस्टेंस फ्रंट) ने ली थी। जापानी प्रधानमंत्री इशिबा ने इस हमले को बेहद चिंता का विषय बताया और भारत के साथ खड़े होने का भरोसा दिलाया।
यूक्रेन और मध्य पूर्व पर भी चर्चा
शिखर वार्ता में दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी अपनी राय साझा की। संयुक्त बयान में दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुरूप यूक्रेन में स्थायी शांति का समर्थन किया. उन्होंने विभिन्न देशों के राजनयिक प्रयासों का स्वागत किया, जो युद्ध समाप्त करने और स्थायी समाधान लाने के लिए किए जा रहे हैं. भारत और जापान ने मध्य पूर्व में शांति और स्थिरता बनाए रखने की अपील करते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने, नागरिकों की सुरक्षा करने और ऐसे कदम न उठाने का आह्वान किया. गाजा की मानवीय स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए दोनों नेताओं ने कहा कि तत्काल और स्थायी युद्धविराम होना चाहिए, सभी बंधकों की रिहाई सुनिश्चित की जानी चाहिए और बिगड़ती मानवीय स्थिति से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने जरूरी हैं।
क्यों अहम है यह वार्ता?
यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत लगातार सीमा पार आतंकवाद पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग की मांग कर रहा है। जापान का खुला समर्थन भारत के लिए कूटनीतिक जीत माना जा रहा है और यह दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करता है।




