नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भारत के प्रधानमंत्री इस समय सिंगापुर दौरे पर हैं। वहां वो सिंगापुर के पीएम लॉरेंस वोंग से मुलाकात कर दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय साझेदारी को मजबूत करने के लिए 4 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। दोनों नेताओं ने भारत और सिंगापुर के बीच द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेतारी के स्तर तक बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। यह समझौता सेमीकंडक्टर, डिजिटल प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य और चिकित्सा क्षेत्र तथा शैक्षिक सहयोग और कौशल विकास पर केंद्रित है।
6 सालों के बाद पीएम मोदी पहुंचे सिंगापुर
बता दें कि, पीएम मोदी 6 सालों के बाद सिंगापुर पहुंचे हैं। सिंगापुर का दौरा पीएम मोदी की एक्ट ईस्ट पॉलिसी के लिए बेहद जरूरी है। सिंगापुर आसियान देशों में भारत का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है। इस दौरान पीएम मोदी ने सिंगापुर के शीर्ष कंपनियों के CEO से मुलाकात की और उन्हें भारत में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने उद्योगपतियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह मेरा भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर तीसरा कार्यकाल है। जो लोग भारत से परिचित हैं उन्हें पता होगा कि भारत में 60 साल बाद किसी सरकार को लगातार तीसरी बार जनता ने मौका दिया है। जनता के इस विश्वास के पीछे मेरी सरकार की नीतियों का है। उन्होंने कहा कि आने वाला समय एविएशन सेक्टर का है और भारत एविएशन सेक्टर के विकास में दुनिया में अव्वल है। इसलिए आपको एयरपोर्स्ट्स के विकास में निवेश करने के लिए भारत आना चाहिये।
काशी में करें निवेश
उन्होंने आगे कहा कि हम प्रगतिशील नीतियों के साथ आगे बढ़ रहे हैं। भारत में राजनीतिक स्थिरता है। हम सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इस क्षेत्र में हम भारत में एक संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र बनाने जा रहे हैं। भारत में टियर 2 और टियर 3 शहरों में स्टार्टअप बहुत तेजी से विकसित हो रहे हैं। इसलिए आपलोग भारत के काशी में निवेश करें।
भारत में आएं और ग्लोबल जॉब मार्केट को एड्रेस करें- पीएम मोदी
उन्होंने कहा कि भारत की आवश्यक्ताओं के साथ स्किल डेवलपमेंट संबंध एक ग्लोबल मार्केट से भी जुड़ा है। इसलिए आपलोग भारत आएं और उसका सर्वे करें। अगर आप स्किल डेवलपमेंट के लिए भारत आएंगे तो ग्लोबल जॉब मार्केट को आसानी से एड्रेस कर सकते हैं।
भारत के लिए क्यों जरूरी है सिंगापुर?
मौजूदा समय में भारत पूरी तरह से अपने एक्ट ईस्ट पॉलिसी पर जोर दे रहा है। इस पॉलिसी की शुरुआत नबंवर 2014 में 12वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। इसका उद्वेश्य हिंद महासागर में बढ़ रही समुद्री क्षमता का मुकाबला करना और साउथ चाइना सी और हिंद महासागर में रणनीतिक साझेदारी का निर्माण करना है। चीन लगातार साउथ चाइना सी में अपनी धौंस माने की कोशिश कर रहा है। इस वजह से आसियान के कई देशों का चीन के साथ लगातार विवाद बना रहता है। ऐसे में पीएम मोदी का सिंगापुर दौरा काफी अहम माना जा रहा है।





