नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भारत और इज़रायल के बीच कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों में एक बड़ा मोड़ आ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की हालिया बैठक में भारत और इज़रायल ने अगले पांच सालों में 50,000 भारतीय कामगारों को इज़रायल में रोजगार देने पर सहमति जताई है। इसका मतलब है कि हर साल औसतन 10,000 भारतीय कामगार इज़रायल में नौकरी के नए अवसर प्राप्त करेंगे। यह फैसला दोनों देशों के बीच दोस्ताना और व्यावसायिक रिश्तों को मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है।
हर साल 10 हजार नए रोजगार
इस समझौते के तहत भारतीय कामगार निर्माण (कंस्ट्रक्शन) और देखभाल (केयरगिविंग) जैसे क्षेत्रों में काम करेंगे। अभी तक अगस्त 2025 तक 20,000 से ज्यादा भारतीय नागरिक इज़रायल में काम कर रहे हैं। नए फैसले के बाद यह संख्या लगातार बढ़ेगी। इसके अलावा मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस सेक्टर, व्यापार और रेस्तरां इंडस्ट्री में भी भारतीयों के लिए नए अवसर खुलेंगे।
कामगारों की सुरक्षा और कानूनी अधिकारों पर जोर
बैठक में दोनों नेताओं ने नवंबर 2023 में हुए फ्रेमवर्क समझौते का जिक्र किया। इस समझौते का उद्देश्य इज़रायल में काम करने वाले भारतीय श्रमिकों की सुरक्षा, सही वेतन और कानूनी अधिकारों को सुनिश्चित करना है। इसके लिए संयुक्त समन्वय समिति (JCC) की नियमित बैठकें कराने और लंबित मुद्दों को जल्द सुलझाने पर भी सहमति बनी। सिर्फ निर्माण और सेवा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि डेटा साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और हाई-टेक इंडस्ट्री में भी भारतीय पेशेवरों के लिए अवसर बढ़ाए जाएंगे। भारत के कुशल युवा इन क्षेत्रों में अपनी विशेषज्ञता से पहचान बना सकेंगे।
प्रवासी भारतीयों से भी मिले पीएम मोदी
अपने दौरे के दौरान पीएम मोदी ने इज़रायल में रह रहे भारतीय समुदाय से मुलाकात की। उन्होंने वहां काम कर रहे भारतीयों के अनुभव सुने और उनके सुझावों पर भी चर्चा की। यह फैसला सिर्फ रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों देशों के आर्थिक और सामाजिक रिश्तों को भी मजबूत करेगा। भारतीय कामगार अपनी मेहनत और कौशल से इज़रायल की अर्थव्यवस्था में योगदान देंगे, वहीं भारत को भी विदेशी रोजगार और अनुभव का लाभ मिलेगा। यह समझौता युवाओं के लिए एक बड़ा मौका है और भारत–इज़रायल संबंधों में नई ऊंचाई का संकेत देता है।




