नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं दिनों दिन बढ़ती जा रही हैं। हाल ही में इस्कॉन मंदिरों पर हुए हमलों और हिंदू समुदाय के लोगों पर हमलों ने चिंता बढ़ा दी है। इस संबंध में बांग्लादेश सरकार ने इन घटनाओं की जांच कराने का वादा किया है लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय और भारत से किया गया उसका ये वादा सिर्फ कागजी साबित हो रहा है, हकीकत में वहां स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा है। अब तो बांग्लादेशी अल्पसंख्यकों के हाथ में डण्डा एवं हथियार लेकर जबरन सामूहिक नमाज अदा कराने के वीडियो भी सामने आने लगे हैं। ऐसे में बांग्लादेश के रिटायर मेजर शरीफ ने विवादित बयान दिया है जिसे सुनने के बाद से हर भारतीय आक्रोशित है।
कोई भी ताकत हमें नहीं रोक सकती- मेजर शरीफ
मेजर शरीफ ने कहा कि भारत और अमेरिका भी उनके खिलाफ खड़े नहीं हो सकते है, उनमें इतना दम नहीं है। उन्होंने दावा किया कि बांग्लादेश में 30 लाख छात्र हैं जो उनके साथ खड़े हैं। मेजर शरीफ का कहना है कि जरूरत पड़ने पर बांग्लादेश चार दिन में कोलकाता पर कब्जा कर सकता है। आज का बांग्लादेश इतना ताकतवर है कि अमेरिका हो या भारत जो भी बांग्लादेश से टकराएगा उसे वह घुटनों पर ला सकता है। मेजर शरीफ ने कहा, “मैं भारत से कहना चाहता हूं कि हम चार दिन में सबकुछ सुलझा लेंगे, तुम्हें बीच में पड़ने की जरूरत नहीं, हमारी सेना मजबूत है और हमारे लोग हमारे साथ हैं। कोई भी ताकत हमें नहीं रोक सकती। “
अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठा रहा है हिंदू समुदाय
बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठा रहा है, लेकिन सरकार से इसे मिली-जुली प्रतिक्रिया मिल रही है। इस्कॉन मंदिर में भी आग लगा दी गई, इसके अलावा मंदिर में तोड़फोड़ की भी खबरें हैं । दूसरी ओर बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की बढ़ती घटनाओं का भारत-बांग्लादेश संबंधों पर गहरा असर पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। दोनों देशों के बीच राजनयिक और सांस्कृतिक रिश्ते काफी समय से आगे बढ़ते रहे हैं, लेकिन इन घटनाओं के बाद दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण हैं। हालिया हिंसा के बीच सोशल मीडिया पर हिंदुओं के खिलाफ भड़काऊ भाषणों के वीडियो सामने आ रहे हैं, जो यहां हो रही अल्पसंख्यकों के खिलाफ भयंकर हिंसा का सबूत दे रहे हैं ।
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रही है हिंसा
गौरतलब है कि बांग्लादेश में सरकार बदलने के बाद अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ हिंसा का स्तर अचानक बढ़ गया, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता पैदा हो गई है। अमेरिकी विदेश मंत्री एंथनी ब्लिंकन, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस से लेकर बांग्लादेशी अल्पसंख्यकों पर कई देशों ने अपनी चिंता जाहिर की है। यहां तक कि अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया एक्स और ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में लिखा, “मैं बांग्लादेश में हिंदुओं, ईसाइयों और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ बर्बर हिंसा की कड़ी निंदा करता हूं, जिन पर भीड़ द्वारा हमला किया जा रहा है और लूटपाट की जा रही है, देश पूरी तरह से अराजकता में है।”प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिर बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की बात कही है, उन्होंने कहा, ”भारत के 1.4 अरब लोग बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।”
बांग्लादेश इस समय अल्पसंख्यकों के लिए इतना अधिक असुरक्षित हो चुका है कि पश्चिम बंगाल सीमा पर उस देश से भारत में शरण चाहने वालों की आमद लगातार बढ़ रही है। 5 अगस्त को शेख हसीना के सत्ता से बेदखल होने के बाद से ही अल्पसंख्यकों पर अत्याचार के एक के बाद एक आरोप लग रहे हैं। यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद से अब तक बांग्लादेश के कई हिस्सों में घर जला दिए गए हैं, धार्मिक संस्थानों में भी तोड़फोड़ हो रही है। यहां 1971 के बाद सबसे अधिक संकट में अल्पसंख्यक हैं ।




