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Thursday, April 2, 2026
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शरणार्थियों की सहायता व संरक्षण के लिये समाधान खोजने की दरकार

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) में संरक्षण मामलों के लिये सहायक उच्चायुक्त गिलियन ट्रिग्स ने अपनी चार-दिवसीय भारत यात्रा के दौरान, हिंसक संघर्षों व उत्पीड़न से जान बचाकर भाग रहे लोगों की सहायता व संरक्षण के लिये नए सिरे से समाधान ढूँढे जाने की आवश्यकता पर बल दिया है. सहायक उच्चायुक्त, गिलियन ट्रिग्स ने अपनी यात्रा में दिल्ली व चेन्नई में शरणार्थियों से मुलाक़ात की और उनकी आशाओं व आकाँक्षाओं को सुना. उन्होंने शरणार्थियों के लिये भारतीय मेज़बानी की लम्बे समय से चली आ रही उदारता की सराहना करते हुए, अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से शरणार्थियों की मदद के लिये हर-सम्भव प्रयास करने पर ज़ोर दिया है. फ़िलहाल, भारत में लगभग दो लाख 16 हज़ार शरणार्थी और आश्रय चाहने वाले लोग रह रहे हैं, जिनमें म्याँमार, अफ़गानिस्तान और श्रीलंका से विस्थापित लोग भी हैं. भारत यात्रा के पहले दिन, गिलियन ट्रिग्स ने सोमवार को भारत के विदेश मंत्रालय व गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, तमिलनाडु राज्य सरकार के अधिकारियों, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, शरणार्थियों, दानदाताओं एवं राजनयिक समुदाय से मुलाकात की. UNHCR एशिया और प्रशान्त के क्षेत्रीय ब्यूरो के निदेशक, इंद्रिका रतवाटे भी भारत दौरे पर उनके साथ थे. सहायक उच्चायुक्त ने दिल्ली और चेन्नई में रह रहे शरणार्थियों से बातचीत की और भारत में रहने के अपने अनुभव एवं उनकी भविष्य की आकांक्षाओं को समझा. अनेक शरणार्थियों ने कोविड-19 महामारी के दौरान, आजीविका को हुए नुक़सान, मकान के किराये व अन्य दैनिक ज़रूरतों को पूरा करने में असमर्थता, एवं शिक्षा में व्यवधान जैसी कठिनाइयों को उनके साथ साझा किया. युवा शरणार्थी प्रतिनिधियों के साथ बैठक के दौरान, लड़कों और लड़कियों ने, तमाम मुश्किलों के बावजूद, अपनी शिक्षा व कौशल प्रशिक्षण फिर से शुरू करने की इच्छा ज़ाहिर की. गिलियन ट्रिग्स ने कहा, "जैसा कि हम सभी के साथ होता है, चाहे वो एक डॉक्टर, शिक्षक या दुकान का मालिक हो, मक़सद पैदा करने व सहनसक्षमता बनाए रखने के लिये, अपनी क्षमताएँ विकसित करने के अवसर बहुत ज़रूरी हैं. शरणार्थियों ने बताया कि ये अवसर, लम्बे समय के लिये वो नींव तैयार करते हैं, जिससे अपने मूल देश में परिस्थितियाँ बेहतर होने पर वो घर वापसी के बारे में भी सोच सकते हैं.” ©UNHCR/Daniel Ginsianmung सुरक्षा के लिये UNHCR की सहायक उच्चायुक्त, गिलियन ट्रिग्स ने अपनी भारत यात्रा के दौरान, नई दिल्ली स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय में शरणार्थी दृश्य कथाकारों की फोटो प्रदर्शनी का शुभारम्भ किया. सहायक उच्चायुक्त ने कोविड-19 के विरुद्ध कार्रवाई और टीकाकरण योजना में शरणार्थियों को शामिल करने के लिये, भारत के प्रयासों की सराहना की. उन्होंने कहा, “भारत में समावेशी टीकाकरण कार्रवाई से लोगों की जान बची है. मेज़बान समुदायों और शरणार्थियों की ज़रूरतों को समान महत्व देने से यह सुनिश्चित होता है कि सबसे कमज़ोर वर्ग के लोगों की रक्षा हो सके.” उन्होंने कहा, “हालाँकि भारत ने, शरणार्थियों पर वैश्विक समझौते के मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुरूप, मानवता और एकजुटता दिखाई है, अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को ज़िम्मेदारी साझा करने, शरणार्थियों की रक्षा करने एवं मेज़बान भारत सरकार से व्यवहारिक सहयोग करने के दायित्व को निभाना चाहिये." यूएन एजेंसी अधिकारी ने शरणार्थियों और मेज़बान समुदायों की मदद के लिये, संयुक्त राष्ट्र, दानदाताओं, निजी क्षेत्र, गैर सरकारी संगठनों, नागरिक समाज और शरणार्थी नेतृत्व वाले संगठनों का आभार प्रकट किया. शरणार्थियों के सामने मौजूद चुनौतियों से निपटने के लिये समावेशन बेहद आवश्यक बताया गया है. बैंक खाता खोलने, सामाजिक कल्याण योजनाओं तक पहुँच और योग्यता की मान्यता के लिये पहचान पत्र आवश्यक होते हैं. इसलिये दस्तावेज़ीकरण के ज़रिये, शरणार्थियों को समृद्धि और भारत की अर्थव्यवस्था में योगदान देने के रास्ते पर ले जाना बहुत अहम हो जाता हैं. सहायक उच्चायुक्त ने, अपनी चेन्नई यात्रा के दौरान तमिलनाडु राज्य सरकार और श्रीलंका उच्चायोग के अधिकारियों से मुलाकात की. उन्होंने श्रीलंकाई शरणार्थियों की स्वैच्छिक, सुरक्षित व सम्मानजनक वापसी समेत, स्थायी समाधान की दिशा में काम करना जारी रखने की तात्कालिक आवश्यकता को दोहराया. श्रीलंका से आए अनेक शरणार्थियों को, भारत में तीस से अधिक वर्षों से संरक्षण प्राप्त हैं और लगभग आधे शरणार्थी भारत में ही पैदा हुए हैं. UNHCR एशिया और प्रशान्त के क्षेत्रीय ब्यूरो के निदेशक, इंद्रिका रतवाटे ने, क्षेत्र में पड़ोसी देशों से आने वाले नए शरणार्थियों के लिये मदद का विस्तार करने का आह्वान किया. उन्होंने कहा, "दुनिया में व्याप्त कई संकटों के बावजूद, यह महत्वपूर्ण है कि अन्तरराष्ट्रीय समुदाय, म्याँमार और अफ़ग़ानिस्तान से शरण एवं सुरक्षा चाहने वाले शरणार्थियों की ज़रूरतों की उपेक्षा न करें, क्योंकि महामारी का सामाजिक-आर्थिक प्रभाव अभी केवल महसूस होना शुरू ही हुआ है." –संयुक्त राष्ट्र समाचार/UN News

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