नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं लगातार गंभीर होती जा रही हैं। ताजा मामला शरीयतपुर जिले के कनेश्वर यूनियन के तिलोई इलाके से सामने आया है, जहां एक हिंदू व्यापारी को न सिर्फ बेरहमी से पीटा गया, बल्कि उसे चाकुओं से गोदने के बाद पेट्रोल डालकर जिंदा जलाने की कोशिश की गई। यह घटना एक बार फिर बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े करती है।
पीड़ित की पहचान 40 वर्षीय खोकन चंद्र दास के रूप में हुई
पीड़ित की पहचान 40 वर्षीय खोकन चंद्र दास के रूप में हुई है, जो दामुद्या क्षेत्र के केउरभंगा बाजार में फार्मेसी चलाते हैं। बुधवार रात करीब 9 बजे वह रोज की तरह अपनी दुकान बंद कर घर लौट रहे थे। जैसे ही वह तिलोई इलाके में पहुंचे, बदमाशों के एक समूह ने उन्हें रास्ते में रोक लिया। पहले उन्हें घेरकर बुरी तरह पीटा गया, फिर धारदार हथियारों से हमला किया गया। इसके बाद हमलावरों ने उनके शरीर पर पेट्रोल डालकर आग लगाने की कोशिश की।
इस हमले के बाद पूरे इलाके में भय और आक्रोश का माहौल है
आग की लपटों से घिरे खोकन चंद्र दास ने आखिरी क्षणों में हिम्मत दिखाते हुए पास के एक तालाब में छलांग लगा दी, जिससे उनकी जान बच गई। स्थानीय लोगों ने किसी तरह उन्हें बाहर निकाला और गंभीर हालत में शरियतपुर सदर अस्पताल पहुंचाया। फिलहाल उनका इलाज जारी है। इस हमले के बाद पूरे इलाके में भय और आक्रोश का माहौल है।
बीते दो हफ्तों में बांग्लादेश में यह चौथी बड़ी हिंसक घटना
यह घटना कोई अकेला मामला नहीं है। बीते दो हफ्तों में बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ यह चौथी बड़ी हिंसक घटना बताई जा रही है। 18 दिसंबर को दीपू चंद्र दास को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला और बाद में उनके शव को पेड़ से बांधकर जला दिया गया। उस पर कथित तौर पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया था। इसके बाद 25 दिसंबर को अमृत मंडल को भीड़ ने मार डाला। हालांकि बांग्लादेश प्रशासन ने इस मामले में दावा किया कि वह आपराधिक गतिविधियों में शामिल था और उगाही के विवाद में उसकी हत्या हुई।
भारत विरोधी बयानों और उग्र राजनीति
29 दिसंबर को मेहराबारी इलाके में एक और घटना सामने आई, जहां सुरक्षा ड्यूटी के दौरान बजेंद्र बिस्वास नामक व्यक्ति की गोली लगने से मौत हो गई। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया, जिसने इसे “मजाक में चली गोली” बताया। इन घटनाओं की श्रृंखला ने यह साफ कर दिया है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं के लिए हालात लगातार असुरक्षित होते जा रहे हैं।
हालात बेहद संवेदनशील
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हालिया तख्तापलट के बाद हालात और बिगड़े हैं। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद छात्रों के उग्र आंदोलनों के बीच मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी। इसके बाद से देश में अस्थिरता बढ़ी है और कई इलाकों में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है। भारत विरोधी बयानों और उग्र राजनीति ने भी हालात को और संवेदनशील बना दिया है।
बांग्लादेश की छवि को गहरा आघात पहुंचा सकती हैं
कुल मिलाकर, खोकन चंद्र दास पर हुआ यह जानलेवा हमला केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा की भयावह तस्वीर पेश करता है। अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसी घटनाएं न सिर्फ सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाएंगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बांग्लादेश की छवि को गहरा आघात पहुंचा सकती हैं।





