नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बांग्लादेश की ICT ने बड़ा फैसला सुनाया है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों और हत्या जैसे पांच मुकदमों में दोषी करार दिया गया है, और उन्हें मौत की सजा सुनाई गई है। शेख हसीना पर आरोप हैं कि उन्होंने 2024 में छात्र-आंदोलन के दौरान निहत्थे नागरिकों पर गोली चलाने, हेलीकॉप्टर और ड्रोन से हमला करने जैसे आदेश दिए थे। तीन-सदस्यीय ट्राइब्यूनल ने करीब 453 पन्नों में बारीकी से अपना फैसला सुनाया। ट्राइब्यूनल के लीड जज Mohammad Gulam Mortuza Majumder थे। यह पहला मौका है जब बांग्लादेश में किसी तत्कालीन प्रधानमंत्री के खिलाफ इस तरह का फैसला आया है।
क्या था मामला?
2024 में बांग्लादेश में छात्र-आंदोलन हुआ था, जिसे सरकार ने उग्र रूप ले लिया माना। ट्रिब्यूनल ने पाया कि यह संख्या में जीत मामलों से बढ़कर मानवता के खिलाफ अपराध की श्रेणी में आती है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि हसीना ने प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाने के आदेश दिए, और सुरक्षा बलों को ड्रोन-हेलीकॉप्टर आदि के ज़रिए कार्रवाई करने का निर्देश दिया। अभियोजन ने कुल 5 अलग-अलग आरोप लगाए थे, जिनमें प्रमुख हैं विरोधियों को खत्म करने का योजना, ड्रोन-हेलीकॉप्टर द्वारा नागरिकों पर हमला साक्ष्यों को मिटाने का प्रयास यह फैसला बांग्लादेश की राजनीति और न्याय-प्रक्रिया दोनों में एक अहम मोड़ माना जा रहा है। देश में सुरक्षा बढ़ाई गई है क्योंकि फैसले के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया है। शेख हसीना की पार्टी और समर्थक इस ट्रिब्यूनल को “राजनीतिक प्रेरित” कह रहे हैं, जबकि सरकार इसे जनता के लिए न्याय का कदम मान रही है।
आगे की राह
हसीना इस समय भारत में निर्वासित हैं और बांग्लादेश लौटकर अदालत में भाग नहीं ले रही थीं। ट्रिब्यूनल ने इन्हें in-absentia (अनुपस्थित में) में दोषी ठहराया। विदेशी संबंधों पर भी इसका असर पड़ने की संभावना है — भारत-बांग्लादेश के बीच इस मुद्दे से कूटनीतिक तनाव भी बढ़ सकता है। न्याय प्रक्रिया, सजा पर अपील और अंतरराष्ट्रीय निगरानी एजेंसियों की प्रतिक्रिया पर आगे ध्यान रहेगा।




