बीजिंग, 19 मई (आईएएनएस)। बाइडेन संस्करण में अमेरिका फस्र्ट दुनिया में उत्पीड़न फैला रही है। वैक्सीन राष्ट्रवाद से लेकर अनर्गल आर्थिक प्रोत्साहन योजना तक, बाइडेन सरकार दूसरे देशों के हितों को नुकसान पहुंचाने के तरीके से अमेरिका के फायदे की खोज कर रही है। हालांकि, वह लगातार बल देते हुए कहती है कि पिछली सरकार की अमेरिकी प्राथमिकता को छोड़ देगा, लेकिन बीते सौ से अधिक दिनों में उसकी कथनी और करनी में जमीन-आसमान का फर्क देखने को मिला है। वैक्सीन राष्ट्रवाद के कारण टीकों का अनुचित वितरण वर्तमान दुनिया में महामारी की रोकथाम और नियंत्रण में बाधा पहुंचाती है। अमेरिका वैक्सीन राष्ट्रवाद को हवा देने वालों में प्रमुख है। कुछ संस्थाओं और मीडिया के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका ने टीकों की लगभग 2 अरब 60 करोड़ खुराकों की जमाखोरी कर ली है। यह संख्या विश्व में वैक्सीन की कुल मात्रा का एक चौथाई भाग है, जो कि अमेरिका की आवश्यकता से कहीं अधिक है। वर्तमान में वैक्सीन के करोड़ों खुराकें अमेरिका के गोदाम में धूल खा रहीं हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दबाव की वजह से बाइडेन सरकार ने हाल में कुछ कदम उठाए। वैक्सीन पेटेंट मुक्त करने के अलावा, बाइडेन सरकार ने 17 मई को घोषित किया कि जून महीने के अंत से पहले, अमेरिका वैक्सीन की अतिरिक्त 2 करोड़ खुराकों की आपूर्ति करेगा। लेकिन सवाल यह है कि कहने की तुलना में करना ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। वर्तमान में चीन और रूस जैसे देश अपने देश के बाहर दूसरों को वास्तविक वैक्सीन सहायता दे रहे हैं। इसके विपरीत, आज तक अमेरिका की कार्रवाई में कुछ भी ठोस दिखाई नहीं दिया। यहीं नहीं, अमेरिका अभी भी लगातार अन्य देशों में मुद्रास्फीति के दबावों को प्रसारित कर रहा है। हालांकि, बाइडेन सरकार की आर्थिक नीति का उद्देश्य घरेलू आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। इसने अनाज सहित प्रमुख वैश्विक वस्तुओं की कीमतों में ऐतिहासिक वृद्धि की है। इसका कारण यह है कि खरबों-डॉलर प्रोत्साहन योजना ने बाजार की उम्मीदों को आगे बढ़ाया है, ब्याज दरों में वृद्धि की है और अमेरिकी डॉलर विनिमय दर के लिए एक मजबूत समर्थन का गठन किया है। अपेक्षाकृत उच्च खाद्य व्यय वाले कुछ कम आय वाले परिवारों को उच्च कीमतों के कारण चुपचाप दर्द को सहन करना पड़ता है। अमेरिकी मौद्रिक नीति को अनिश्चित काल के लिए ढीला नहीं किया जा सकता है। एक बार जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दर को बढ़ा देता है, तो अमेरिकी डॉलर रखने के लिए बाजार का उत्साह बढ़ जाएगा। डॉलर की वापसी से दबाव को रोकने के लिए उभरते बाजारों को ब्याज दर बढ़ाने के लिए मजबूर किया जाता है। हालांकि कुछ उभरते बाजार देशों में अभी तक महामारी पर काबू नहीं पाया जा सका है। ब्याज दर को बढ़ाने से उनकी पहले से ही कमजोर अर्थव्यवस्था को गंभीर झटका लगेगा। अमेरिका कहता है कि वह अमेरिका फस्र्ट को छोड़ देगा, लेकिन बाइडेन सरकार अभी भी इस सड़क पर आगे दौड़ रही है, जो गलत साबित हुई है। वह सारी दुनिया में और अधिक बीमारी, भूखमरी और गरीबी ला रही है। अमेरिकी नेता ने इस साल फरवरी में अपने पहले विदेश नीति भाषण में घोषणा की कि अमेरिका वापस आ गया है, लेकिन अगर अमेरिका वास्तव में अंतरराष्ट्रीय परिवार में लौटना चाहता है, तो उसे अपने कार्यों में संकीर्णता और स्वार्थ को त्यागना होगा और सच्चे बहुपक्षवाद का अभ्यास करना होगा। ( साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग ) –आईएएनएस आरजेएस




