नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बांग्लादेश में आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग ने अंतरिम सरकार के प्रमुख और नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के खिलाफ एक बड़ा कानूनी और राजनीतिक दांव खेला है। अवामी लीग ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) में शिकायत दर्ज कराकर यूनुस पर मानवता के विरुद्ध अपराधों और हिंसक विद्रोह के जरिए असंवैधानिक रूप से सत्ता हथियाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
ICC में शिकायत: 400 नेताओं की हत्या का दावा
लंदन स्थित कानूनी फर्म डॉटी स्ट्रीट चैंबर्स ने हेग स्थित ICC में अवामी लीग का प्रतिनिधित्व किया। याचिका रोम संविधि के अनुच्छेद 15 के तहत दायर की गई है, जो अभियोजक को जांच शुरू करने की शक्ति देती है।याचिका में आरोप लगाया गया है कि जुलाई 2024 से अब तक अवामी लीग के 400 नेताओं और कार्यकर्ताओं की हत्या की गई है। इनमें से कई की हत्याएं हिंसक भीड़ की तरफ से’ की गई थीं।
कानूनी फर्म ने अपने बयान में कहा, यह मानने का उचित आधार है कि कथित अपराध मानवता के विरुद्ध अपराध हैं, जिनमें हत्या और उत्पीड़न शामिल हैं।याचिका में तर्क दिया गया है कि बांग्लादेश में इन अपराधों की निष्पक्ष जांच या अभियोजन की कोई वास्तविक संभावना नहीं है, जिससे दोषियों को दंडमुक्ति मिल जाएगी।
शेख हसीना का पलटवार: अवामी लीग बांग्लादेश की धरती से बनी पार्टी है
जुलाई में व्यापक छात्र आंदोलन के बाद सत्ता से बेदखल हुईं 78 वर्षीय शेख हसीना, जिन पर खुद कई मामले चल रहे हैं, शेख हसीना भी यूनुस सरकार पर हमला बोला है।अवामी लीग को हमलों और अदालती मामलों के माध्यम से परेशान नहीं किया जा सकता है। इस बार यह साबित हो जाएगा। अवामी लीग बांग्लादेश की धरती और वहां के लोगों की ओर से बनाई गई पार्टी है।
क्या होगा ICC में एक्शन? चुनाव से पहले बढ़ी अनिश्चितता
ICC में शिकायत दर्ज होने से बांग्लादेश की राजनीति में अनिश्चितता बढ़ गई है, जहां अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) केवल उन देशों में जांच कर सकता है जो रोम संविधि के सदस्य हैं। बांग्लादेश इस संविधि का सदस्य है।
याचिका दायर होने के बाद, आईसीसी अभियोजक के कार्यालय को यह निर्धारित करना होगा कि आरोपों में आगे की जांच शुरू करने का कोई उचित आधार है या नहीं। इस प्रक्रिया में समय लग सकता है। चुनाव से ठीक पहले एक नोबेल पुरस्कार विजेता (मोहम्मद यूनुस) के खिलाफ मानवता के विरुद्ध अपराधों की जांच की मांग का सीधा असर अंतरिम सरकार की साख और आगामी चुनावी माहौल पर पड़ेगा।यह घटनाक्रम दिखाता है कि बांग्लादेश में दो सबसे बड़े राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के बीच की लड़ाई अब देश की सीमाओं से निकलकर अंतर्राष्ट्रीय न्याय मंच तक पहुँच चुकी है।




