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Monday, March 2, 2026
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ईरान से तनाव के बीच ट्रंप ने की बड़ी तैयारी, भेजा सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर, जानें क्‍या है इरादा?

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अपने प्रमुख एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड और यूएसएस अब्राहम लिंकन को मध्य एशिया और फारस की खाड़ी में तैनात करने का निर्णय लिया है।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को स्पष्ट कर दिया कि वह अपने सबसे बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर को पूरी टीम के साथ मध्य एशिया भेज रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है, लेकिन परमाणु कार्यक्रम को लेकर मतभेद कम नहीं हुए हैं। इसी कारण ट्रंप ने कई मौकों पर सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है। 

जब अमेरिका के प्रमुख एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड की तैनाती के बारे में पूछा गया, तो ट्रंप ने कहा कि इसे जल्द ही रवाना किया जाएगा और यदि ईरान के साथ समझौता नहीं होता है तो इसकी आवश्यकता पड़ेगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूएसएस अब्राहम लिंकन शिप को भी साथ में रवाना किया गया है।

ईरान में विरोध ने बढ़ाई तनाव की आग

ईरान में हाल के विरोध प्रदर्शनों और उन्हें दबाने के लिए आयातुल्ला खामेनेई के कदमों के बाद अमेरिका-ईरान संबंध और तनावपूर्ण हो गए हैं। अमेरिका ने साफ कर दिया है कि यदि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका की शर्तों का पालन नहीं करता है, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इस बीच गाइडेड मिसाइलों से लैस युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन पहले से ही अरब सागर में तैनात है। ध्यान देने वाली बात यह है कि पिछले सप्ताह ही इसी युद्धपोत ने ईरानी ड्रोन को निशाना बनाकर मार गिराया था।

ईरान पर दबाव बढ़ाने की तैयारी

यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड, जो वेनेजुएला में अभियान पर था, अब सीधे मध्य एशिया की ओर भेज दिया गया है। दोनों देशों के बीच पिछले सप्ताह ओमान में हुई बातचीत के बावजूद कोई ठोस समझौता नहीं हुआ, जिसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि समझौता नहीं होता है, तो परिणाम गंभीर होंगे।

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार यह निर्णय ईरान के साथ परमाणु वार्ता में गतिरोध और क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच वाशिंगटन की सैन्य क्षमता दिखाने के उद्देश्य से लिया गया है। यह युद्धपोत अब फारस की खाड़ी और अरब सागर में पहले से तैनात यूएसएस अब्राहम लिंकन और उसके सहायक बेड़े के साथ शामिल होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि दो विमानवाहक पोतों की एक साथ मौजूदगी अमेरिका की नौसैनिक ताकत को अभूतपूर्व रूप से बढ़ाएगी और ईरान पर कूटनीतिक व सैन्य दबाव को मजबूत करेगी। इस कदम के पीछे ट्रंप की हाल ही में बेंजामिन नेतन्याहू के साथ लंबी चर्चा भी मानी जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस तैनाती में गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक और निगरानी विमान भी शामिल हैं।

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