नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के बाद अब क्यूबा के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। गुरुवार को ट्रंप ने एक नए आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत अगर कोई देश क्यूबा को तेल की आपूर्ति करता है, तो अमेरिका उस देश से आने वाले आयात पर भारी टैरिफ लगाएगा। ट्रंप के इस फैसले से क्यूबा की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से क्यूबा में ऊर्जा संकट गहरा सकता है। अमेरिका का यह आदेश उन देशों पर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, जो क्यूबा के साथ ऊर्जा व्यापार कर रहे हैं।
क्या है ट्रंप की रणनीति?
सूत्रों की मानें तो ट्रंप का नया आदेश सीधे मेक्सिको को निशाने पर रखता है। मेक्सिको, जो लंबे समय से क्यूबा को तेल सप्लाई कर रहा है, ट्रंप प्रशासन की नजर में अब प्रेसर पॉइंट बन गया है। हालांकि मेक्सिको की सरकार ने कठिन परिस्थितियों में भी क्यूबा का लगातार समर्थन किया है, लेकिन ट्रंप का यह कदम उसे अपने पड़ोसी देश पर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
मेक्सिको और क्यूबा के बीच बढ़ सकती है दूरी
डोनाल्ड ट्रंप के नए आदेश के बाद चर्चा तेज हो गई है कि अमेरिका के दबाव के चलते मेक्सिको क्यूबा को तेल सप्लाई कम कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ऐसा हुआ, तो मेक्सिको और क्यूबा के बीच राजनीतिक और आर्थिक संबंधों में तनाव बढ़ सकता है। इस कदम से दोनों देशों के बीच दूरी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
क्यूबा में बढ़ सकता है ऊर्जा संकट
अमेरिका के कड़े आर्थिक प्रतिबंधों के चलते क्यूबा पहले ही ऊर्जा और आर्थिक संकट का सामना कर रहा है और विदेशी मदद पर काफी निर्भर है। देश ने लंबे समय तक मेक्सिको, वेनेजुएला और रूस जैसे सहयोगी देशों से तेल की आपूर्ति ली है। लेकिन वेनेजुएला में अमेरिकी हस्तक्षेप और पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाने के बाद ट्रंप ने स्पष्ट किया था कि अब वेनेजुएला का तेल क्यूबा तक नहीं जाएगा। इस कदम के बाद क्यूबा की सरकार पर दबाव और बढ़ गया है और देश की राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता के लिए खतरा बढ़ सकता है।
क्यूबा को कितनी तेल आपूर्ति करता है मेक्सिको
मैक्सिको की सरकारी तेल कंपनी पेमेक्स (Pemex) की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से सितंबर 2025 तक कंपनी ने हर दिन लगभग 20,000 बैरल तेल क्यूबा को सप्लाई किया। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अमेरिकी दबाव के कारण यह आपूर्ति कम हो जाती है, तो क्यूबा को गंभीर आर्थिक और ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है।





