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पीठासीन न्यायाधीश से जांच करवा लें, आरोप साबित होने पर राजनीति से संन्यास के लिए तैयारः ईटेला

हैदराबाद, मई, 01 (हि.स.)। स्वास्थ्य मंत्री ईटेला राजेंदर ने अपने ऊपर लगे भूमि कब्जे संबंधी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए मुख्यमंत्री केसीआर को पीठासीन न्यायमूर्ति से जांच करवाने की चुनौती दी है। उन्होंने कहा है कि वे कभी गलत काम नहीं करते। उन्होंने केसीआर को अपनी पूरी संपत्ति की जांच करवाने की चुनौती भी दी। उन्होंने कहा कि वे किसी भी प्रकार की जांच के लिए तैयार हैं। उन्होंने बताया कि अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने सरकार से एक रुपये का भी बेजा तरीके से लाभ नहीं लिया। उन्होंने आगे कहा कि संपत्तियों व पदों के लिए वे झुकने वाले नहीं है। उनके लिए आत्मसम्मान से बढ़कर कोई पद नहीं है। उन्होंने अपने जीवन में आज तक किसी के साथ अन्याय नहीं किया। हैदराबाद में शामिरपेट स्थित आवास पर उनके समर्थकों द्वारा आयोजित पत्रकार सम्मेलन में पत्नी जमुना की उपस्थिति में उन्होंने ताल ठोककर कहा कि वे छह बार विधायक के रूप में निर्वाचित हुए। अगर उनके निर्वाचन क्षेत्र का एक व्यक्ति भी उन पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाएगा तो वे राजनीति से संन्यास ले लेंगे। उन्होंने कहा कि सीबीआई ही नहीं देश में जितनी भी जांच एजेंसियां हैं, उन सभी से उनकी संपत्तियों की जांच करवायें। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पूरे राजनीतिक जीवन को मटियामेट करने का षड्यंत्र रचा गया है। उन्होंने कहा कि धर्म और अधर्म के बीच के संघर्ष में अंतिम जीत धर्म और न्याय की ही होती है। ईटेला ने अपने खिलाफ लगे आरोपों पर स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 में अपने मुर्गी पालन उद्योग विस्तारीकरण के लिए अन्यमपेट और हकीमपेट में छह लाख रुपये प्रति एकड़ दर पर 40 एकड़ और बाद में 7 एकड़ भूमि खरीदी थी। मुर्गी पालन उद्योग के लिए कैनरा बैंक से 100 करोड़ का ऋण लिया था। ईटेला ने विवाद का केंद्र बने अन्यमपेट व हकीमपेट के किसानों की भूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि वे उक्त किसानों के पास नहीं गये, बल्कि किसान उनके पास आये थे। किसानों ने उनसे कहा था कि उन्हें आवंटित असाइन्ड भूमि से कोई फायदा नहीं हो रहा है, क्योंकि वह बंजर भूमि है और खेती के अनुकूल नहीं इसीलिए अपनी जरूरतों के लिए वे भूमि बेच भी नहीं पा रहे हैं। उन्होंने उक्त किसानों को जवाब देते हुए कहा कि असाइन्ड भूमि को बेचा नहीं जा सकता और न ही कोई खरीद सकता लेकिन भूमि सरकार को वापस की जा सकती है। उसके बाद किसानों ने स्वैच्छिक रूप से संबंधित एमआरओ को भूमि दे दी। आज भी उक्त पत्र एमआरओ कार्यालय में ही है और उक्त भूमि उन के पास ही है। उन्होंने सवाल किया कि अगर वहां पर उनका कोई शेड है, तो उसको ढहा कर भूमि पर कब्जा कर सकते हैं। ईटेला ने एक सवाल के जवाब में कहा कि आज-कल रिंग रोड, उद्योगों, सिटी आदि सभी सरकारी परियोजनाओं के लिए असाइन्ड भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार के पास पहले राज्यभर में कितने एकड़ असाइन्ड भूमि है, किसानों के पास कितनी है और कब्जेदारों के पास कितनी है, इसकी जांच करानी चाहिए। भू कब्जे के आरोप के मद्देनजर क्या आप मंत्री पद से इस्तीफा दे रहे हैं, इस सवाल पर ईटेला ने कहा कि नहीं। पहले आरोपों की सच्चाई उजागर होनी चाहिए। इस बीच ताजा समाचार मिलने तक स्वास्थ्य मंत्री के निर्वाचन क्षेत्र से हजारों में उनके समर्थक हैदराबाद पहुंचे हैं। उधर, मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने सचिव सोमेश कुमार को मेदक जिला मसाईपेट मंडल के अच्चमपेट के निकट भू कब्जों से संबंधित आरोपों की जिलाधीश से समग्र जांच कर रिपोर्ट देने के आदेश दिये हैं। शिकायत करने वाले किसानों ने उन्हें उक्त भूमि वापस दिलाने का आग्रह किया है। हिन्दुस्थान समाचार/नागराज

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