नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बॉलीवुड के वरिष्ठ अभिनेता परेश रावल ने हाल ही में एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में ऐसा बयान दिया है, जिसने फिल्म जगत में नई चर्चा छेड़ दी है। अभिनेता ने कहा कि राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों (National Awards) की चयन प्रक्रिया पूरी तरह लॉबिंग-फ्री नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि यहां लॉबिंग का स्तर ऑस्कर या अन्य पुरस्कारों की तुलना में काफी कम होता है।
नेशनल अवॉर्ड की अपनी प्रतिष्ठा है
राज शमानी के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान परेश रावल ने कहा, अवार्ड्स के बारे में मुझे बहुत जानकारी नहीं है, लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि नेशनल अवॉर्ड्स में थोड़ा-बहुत लॉबिंग होती होगी, उतनी नहीं जितनी बाकी अवॉर्ड्स में होती है। बाकी अवॉर्ड्स की तो बात ही क्या करें। नेशनल अवॉर्ड तो नेशनल अवॉर्ड है, उसकी अपनी प्रतिष्ठा है। उन्होंने साफ कहा कि राष्ट्रीय पुरस्कारों का स्तर और गरिमा अभी भी बरकरार है, लेकिन यह कहना कि उनमें किसी तरह की लॉबिंग नहीं होती, पूरी तरह सही नहीं होगा।
लॉबिंग तो ऑस्कर में भी होती है
परेश रावल ने यह भी कहा कि लॉबिंग केवल भारत तक सीमित नहीं है।लॉबिंग तो ऑस्कर अवॉर्ड्स में भी होती है। वहां बड़े स्तर पर प्रचार, नेटवर्किंग और पार्टियों का दौर चलता है।
उन्होंने बताया कि, कई बार फिल्म के लिए माहौल बनाने के उद्देश्य से निर्णायकों या वोटिंग मेंबरों को प्रभावित करने के लिए खास इवेंट्स और पार्टियाँ आयोजित की जाती हैं।मान लीजिए किसी राज की फिल्म है, तो सारे एकेडमी के मेंबर्स को बुलाया जाता है, माहौल बनाया जाता है यही लॉबिंग है, उन्होंने कहा।
मेरे लिए असली अवॉर्ड निर्देशक और लेखक की तारीफ है
जब परेश रावल से पूछा गया कि क्या उन्हें अब भी किसी बड़े अवॉर्ड की इच्छा है, तो उन्होंने साफ कहा, अगर निर्देशक और लेखक मेरे काम की तारीफ करते हैं, तो वही सबसे बड़ा अवॉर्ड है मेरे लिए।उन्होंने कहा कि सच्ची सराहना उसी वक्त महसूस होती है जब रचनात्मक लोग आपके काम को दिल से स्वीकार करते हैं, न कि तब जब कोई ट्रॉफी हाथ में आती है।
1993 में मिला था नेशनल अवॉर्ड
परेश रावल को 1993 में ‘वो छोकरी’ और सर फिल्मों में उत्कृष्ट अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। यह उनके करियर का अहम पड़ाव रहा।
फिर परदे पर दमदार वापसी
हाल ही में परेश रावल ‘द ताज स्टोरी’ में नज़र आए, जिसमें उन्होंने आगरा के एक टूर गाइड की भूमिका निभाई है। कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है जो ताजमहल के इतिहास पर सवाल उठाने के बाद विवादों में घिर जाता है और फिर न्याय के लिए अदालत का दरवाज़ा खटखटाता है। इसके अलावा वे आयुष्मान खुराना और रश्मिका मंदाना की फिल्म ‘थम्मा’ में भी अहम भूमिका में दिखे थे। इस हॉरर-कॉमेडी का निर्देशन आदित्य सरपोतदार ने किया है।
आने वाली बड़ी फिल्में
अभिनेता के पास फिलहाल कई बड़े प्रोजेक्ट हैं
हेरा फेरी 3
भूत बंगला
वेलकम टू द जंगल
इन फिल्मों में दर्शक उन्हें अलग-अलग किरदारों में देखने वाले हैं।परेश रावल का यह बयान फिल्म इंडस्ट्री में पुरस्कारों की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर एक बार फिर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने साफ कहा कि नेशनल अवॉर्ड की गरिमा अब भी बरकरार है, लेकिन सिस्टम में थोड़ी-बहुत लॉबिंग अब भी मौजूद है और यह केवल भारत ही नहीं, बल्कि विश्वस्तर के पुरस्कारों तक फैली हुई प्रवृत्ति है।




