नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता परेश रावल की बहुचर्चित फिल्म ‘द ताज स्टोरी’ रिलीज़ हो चुकी है। यह फिल्म ताजमहल के ‘अनकहे’ इतिहास को कोर्ट रूम ड्रामा के ज़रिए सामने लाने का दावा करती है। अगर आप सिर्फ मनोरंजन की तलाश में हैं, तो शायद यह फिल्म आपके लिए नहीं है, क्योंकि यह एंटरटेनमेंट से कहीं ज्यादा इतिहास की किताबों पर सवाल उठाने का प्रयास करती है। टिकट बुक करने से पहले, आइए जानते हैं तुषार अमरीश गोयल के निर्देशन में बनी इस फिल्म की कहानी, एक्टिंग और दर्शकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया।
कहानी: टूर गाइड की कोर्ट रूम जंग!
फिल्म की कहानी एक कोर्ट रूम ड्रामा पर आधारित है। परेश रावल इसमें एक टूर गाइड की भूमिका में हैं, जो बाद में ताजमहल के ‘वास्तविक’ इतिहास के लिए कानूनी लड़ाई लड़ते दिखते हैं। कहानी का मुख्य केंद्र यही है कि,ताजमहल एक मकबरा है या मंदिर? यह फिल्म दर्शकों को यह दिखाने की कोशिश करती है कि अब तक उन्हें जो इतिहास पढ़ाया गया, वह पूरी तरह सच नहीं है।
तुषार अमरीश गोयल ने एक लेखक के रूप में निश्चित तौर पर दर्शकों के हर सवाल का जवाब देने की कोशिश की है। रिव्यू के मुताबिक, उनकी शानदार राइटिंग इसे एंटरटेनमेंट से ऊपर उठाती है।
एक्टिंग: परेश रावल की मौजूदगी ही USP
परेश रावल की अदाकारी पर सवाल उठाना बेमानी है। एक बार फिर, उनकी उपस्थिति ही फिल्म की सबसे बड़ी खासियत है। वह अपनी अदाकारी में जान डाल देते हैं। उनके अलावा, ज़ाकिर हुसैन, अमृता खानविलकर, नमित दास और स्नेहा वाघ की एक्टिंग को भी दमदार बताया जा रहा है।
‘मूवी ऑफ द ईयर’ या ‘बोरिंग प्रोपेगेंडा’?
‘द ताज स्टोरी’ को लेकर सोशल मीडिया पर दर्शकों की प्रतिक्रियाएं दो खेमों में बंटी हुई हैं, जिससे फिल्म को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।
परश रावल की एक्टिंग और तुषार के डायरेक्शन की तारीफ। कई लोगों ने इसे ‘मूवी ऑफ द ईयर’ बताते हुए कहा कि यह उन लाखों लोगों की भावनाओं को दिखाती है जो ‘साफ-सुथरी हिस्ट्री’ पर सवाल उठाते हैं। इसे ‘अविश्वसनीय’ भी बताया जा रहा है।
कुछ यूजर्स ने इसे ‘प्रोब्लमैटिक’ बताया है। उनके मुताबिक, फिल्म की एक्टिंग, डायरेक्शन और कहानी दोनों ही बहुत खराब और जबरदस्ती की गई है। कुछ लोगों को यह फिल्म बेहद बोरिंग लगी है।
अगर आप इतिहास के एक खास दृष्टिकोण को जानने में रुचि रखते हैं और परेश रावल की दमदार एक्टिंग देखना चाहते हैं, तो आप इस फिल्म को देख सकते हैं। लेकिन अगर आप ‘शुद्ध मनोरंजन’ या निर्विवाद ऐतिहासिक प्रमाणों की अपेक्षा कर रहे हैं, तो सोच-समझकर टिकट बुक करें।




