नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। देश के प्रमुख फिल्म पुरस्कार Filmfare Awards के हालिया वितरण के बाद बॉलीवुड में विवाद खड़ा हो गया है। ‘द केरल स्टोरी’ (The Kerala Story) जैसी राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म के निर्देशक सुदीप्तो सेन ने फिल्मफेयर को ‘सिनेमा के नाम पर तमाशा’ करार देते हुए उसे कठघरे में खड़ा कर दिया है। सेन ने पुरस्कार समारोह को ‘भारतीय सिनेमा का एक्सपोज’ बताते हुए आरोप लगाया कि ‘Laapataa Ladies’ जैसी ‘बेधड़क चोरी की गई’ (Blatantly Plagiarised) फिल्मों को सबसे बड़े सम्मान से नवाजा गया है।
सुदीप्तो सेन के तीन बड़े आरोप: ‘चोरी’, ‘क्रूरता’ और ‘बॉक्स ऑफिस फ्लॉप’
सुदीप्तो सेन ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक विस्तृत नोट साझा करते हुए 2024 के अवार्ड्स की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए। हालांकि उन्होंने किसी फिल्म का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके संकेत स्पष्ट थे:
‘बेधड़क चोरी की गई फिल्म’ (Blatantly Plagiarised): उनका इशारा ‘Laapataa Ladies’ की ओर था, जिसने सर्वश्रेष्ठ फिल्म सहित 12 ट्रॉफियां जीतीं। सेन के अनुसार, फिल्मफेयर ने एक नकल की गई फिल्म को चुना है।
‘क्रूरता का ट्यूटोरियल’ (Tutorial of Brutality): सेन ने ‘Kill’ फिल्म पर निशाना साधा, जिसे अवार्ड्स मिले।
’72 घंटे में फ्लॉप’ (Did not survive the box office for more than 72 hours): उनका तीसरा निशाना ‘I Want To Talk’ फिल्म पर था, जिसका बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा।
Filmfare का सिनेमा में जीरो योगदान
सुदीप्तो सेन ने अपने पोस्ट में साफ तौर पर कहा कि साल 2024 के सबसे बेहतरीन काम को इस पुरस्कार समारोह ने नज़रअंदाज़ कर दिया। उन्होंने कहा, “जैसा कि अपेक्षित था, 2024 के सर्वश्रेष्ठ काम अनसुलझे रहे।”
सेन ने आगे फिल्म इंडस्ट्री के ‘झूठे भाईचारे’ पर भी तंज कसा।
“मैं खुश हूँ कि यह ‘वुड’ समुदाय हमें पहचानता नहीं, आमंत्रित नहीं करता और न ही चुनता है। हम झूठी मुस्कान, झूठे भाईचारे और सबसे महत्वपूर्ण, किसी भी चाटुकारिता में लिप्त होने से बचे हुए हैं।”
उन्होंने Filmfare पर सीधा हमला करते हुए कहा कि फिल्मी पत्रकारिता और संस्थाएँ सिर्फ सितारों के ग्लैमर के पीछे भागती हैं। उनके अनुसार, ये संस्थान “सिनेमा कला के प्रति ZERO योगदान” रखते हैं, ठीक वैसे ही जैसे छोटे शहरों के लोग अमिताभ बच्चन या शाहरुख खान के घर के सामने जमा होते हैं।
राष्ट्रीय पुरस्कार बनाम Filmfare: विवाद की जड़
सुदीप्तो सेन ने अपनी पोस्ट में यह भी याद दिलाया कि Filmfare ने उनकी फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने का कड़ा विरोध किया था।
‘द केरल स्टोरी’ के डायरेक्टर सुदीप्तो सेन का Filmfare पर वार! बोले– ये अवॉर्ड शो अब ‘तमंचे पे डिस्को’ बन चुका है, असली सिनेमा नहीं दिखता यहां ‘Laapataa Ladies’ को बताया चोरी की फिल्म, बोले बॉलीवुड में टैलेंट नहीं, बस चमक-दमक और लॉबी चलती है ईमानदार फिल्में होती हैं अनदेखी, नकली कहानियों को मिलते हैं अवॉर्ड्स! सिनेमा का सम्मान अब मजाक बन चुका है, असली कलाकारों के लिए कोई जगह नहीं बची; सुदीप्तो ने कहा, अब वक्त आ गया है कि दर्शक खुद तय करें, असली फिल्म कौन सी है।
गौरतलब है कि ‘द केरल स्टोरी’, जो केरल की उन महिलाओं की कहानी बताती है जिन्हें इस्लाम में परिवर्तित कर ISIS में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया था, के लिए सुदीप्तो सेन को हाल ही में सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। यह विवाद एक बार फिर यह सवाल उठाता है कि क्या बड़े पुरस्कार समारोह केवल कमर्शियल ‘तमाशे’ बनकर रह गए हैं, या वे सच में सिनेमा की कला का सम्मान करते हैं।





