नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने उनकी जमानत याचिका की सुनवाई सोमवार, 16 फरवरी 2026 तक के लिए टाल दी।दोपहर 2:30 बजे सुनवाई शुरू हुई। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत ने राजपाल के वकील के अनुरोध पर सुनवाई सोमवार तक टाल दी और प्रतिवादी को नोटिस जारी किया।अदालत ने अभिनेता को फटकारते हुए कहा, आप जेल इसलिए गए क्योंकि आपने अपना वादा पूरा नहीं किया। फिलहाल राजपाल यादव को चार रातें और तिहाड़ जेल में बिताना होगा।
सुनवाई का हाल
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत ने स्पष्ट कहा, आप जेल इसलिए गए क्योंकि आपने अपना वादा पूरा नहीं किया। कोर्ट ने वकील के अनुरोध पर सुनवाई स्थगित की, लेकिन शिकायतकर्ता पक्ष को जमानत याचिका पर जवाब दाखिल करने का निर्देश भी दिया।राजपाल यादव के वकील ने कहा कि उन्होंने अभिनेता से संपर्क किया लेकिन नहीं मिल पाए। उन्होंने बेल एप्लीकेशन फाइल की और अदालत से कहा कि केस सोमवार तक टाला जाए, तब तक कुछ उपाय लेकर आएंगे। अदालत ने इस पर सहमति जताई।
5 फरवरी को तिहाड़ जेल में सरेंडर
अभिनेता राजपाल यादव ने बीते 5 फरवरी को कोर्ट की फटकार के बाद तिहाड़ जेल में सरेंडर किया। यह मामला साल 2010 से चल रहा है, जब उन्होंने फिल्म ‘अता पता लापता’ बनाने के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से कर्ज लिया था।अदालत में जमानत के लिए उनकी ओर से बेल एप्लीकेशन दायर की गई, जिसमें एक पारिवारिक शादी में शामिल होने को कारण बताया गया।
सुनवाई के दौरान राजपाल के वकील ने अदालत को बताया कि उन्होंने अभिनेता से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि बेल एप्लीकेशन दायर की गई है और दूसरी तरफ से जवाब मांगा जा सकता है। इस पर कोर्ट ने सुनवाई सोमवार तक के लिए टाल दी।दोपहर 2:30 बजे सुनवाई के दौरान वकील ने फिर कहा कि सोमवार तक कुछ समाधान लेकर आएंगे। कोर्ट ने केस सोमवार तक के लिए स्थगित कर दिया।
कोर्ट की चेतावनी
जस्टिस शर्मा ने अदालत में कहा कि राजपाल ने कम से कम दो दर्जन मौकों पर वादा किया था कि वह पैसा देंगे, लेकिन हर बार अदालत के भरोसे को तोड़ा गया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि अभिनेता को पहले अपना मन बनाना चाहिए और तभी अगली सुनवाई होगी।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद 2010 से चला आ रहा है। राजपाल यादव ने फिल्म ‘अता पता लापता’ बनाने के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपये का कर्ज़ लिया था। फिल्म में लगभग 170 कलाकार थे, लेकिन यह फ्लॉप हो गई। फिल्म की असफलता के कारण ऋण वापस नहीं चुका और कंपनी ने अदालत का रुख किया। आरोप है कि राजपाल द्वारा दिए गए चेक बाउंस हो गए थे।
पहले की सुनवाई और जेल की स्थिति
2013 में, गलत हलफनामा देने के कारण उन्हें 10 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया, लेकिन बाद में दिल्ली हाई कोर्ट की खंडपीठ ने उनकी सजा निलंबित कर दी।
निचली अदालत ने राजपाल को 6 महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई, जिसे उन्होंने हाई कोर्ट में चुनौती दी।
जून 2024 में दिल्ली हाई कोर्ट ने सजा पर अस्थायी रोक लगाई और दोनों पक्षों को समझौते की संभावना तलाशने की सलाह दी।
जनवरी 2026 में अदालत का अंतिम निर्देश
कोर्ट ने अभिनेता को अंतिम मौका दिया। उनके वकील ने बताया कि राजपाल ने 50 लाख रुपये का इंतजाम कर लिया है और भुगतान के लिए एक हफ्ते का समय मांगा था। हालांकि, जस्टिस शर्मा ने सरेंडर के लिए समय बढ़ाने की अर्जी खारिज कर दी और 4 फरवरी 2026 को राजपाल यादव को तिहाड़ जेल में सरेंडर करने का आदेश दिया।
अगली सुनवाई
अब इस मामले में हाई कोर्ट सोमवार, 16 फरवरी 2026 को अंतिम फैसला कर सकती है। अदालत की निगरानी में यह केस बॉलीवुड और वित्तीय विवादों के मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल बन चुका है।
राजपाल यादव का यह मामला 2010 से चल रहे आर्थिक और कानूनी विवाद का नतीजा है। बार-बार वादों के बावजूद भुगतान न करना और चेक बाउंस होने के कारण उन्हें कोर्ट ने सख्त कार्रवाई के तहत जेल में रखा है। अगली सुनवाई तय करेगी कि उन्हें जमानत मिलेगी या नहीं।


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