नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । दक्षिण भारत के सुपरस्टार पवन कल्याण एक ऐसा नाम हैं, जो न सिर्फ फिल्मों में बल्कि राजनीति में भी अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। फैंस उन्हें प्यार से ‘पावर स्टार’ कहकर बुलाते हैं। पवन कल्याण साउथ सिनेमा के सबसे चहेते और प्रभावशाली अभिनेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने एक्टिंग की दुनिया में जबरदस्त लोकप्रियता हासिल करने के बाद राजनीति में कदम रखा और यहां भी उनका असर साफ दिखाई देता है। आज पवन कल्याण अपना 56वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस खास मौके पर एक नजर डालते हैं उनके जीवन के उन पहलुओं पर जिन्होंने उन्हें सिल्वर स्क्रीन से लेकर सियासी मंच तक ‘पावरफुल’ बना दिया।
पवन कल्याण के नाम और पहचान की कहानी
पवन कल्याण का जन्म 2 सितंबर 1971 को बापटला, आंध्र प्रदेश के एक तेलुगु परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम कोनिडाला वेंकट राव और मां का नाम अंजना देवी है। पवन की स्कूली शिक्षा नेल्लोर के सेंट जोसेफ हाई स्कूल में हुई थी। बहुत कम लोगों को पता है कि पवन कल्याण का असली नाम कोनिडाला कल्याण कुमार है। लेकिन उन्हें ‘पवन’ नाम कैसे मिला, इसके पीछे एक खास वजह है। दरअसल, मार्शल आर्ट में उनकी गहरी रुचि और शानदार प्रदर्शन के चलते, इशिन-रयू कराटे एसोसिएशन ने उन्हें ‘पवन’ की उपाधि से सम्मानित किया। यही नाम आगे चलकर उनकी पहचान बन गया। पवन कल्याण ब्लैक बेल्ट होल्डर भी हैं।
फिल्मों में ऐसे हुई ‘पावर स्टार’ की शुरुआत
पवन कल्याण ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत साल 1996 में की थी, जब वह पहली बार निर्देशक ईवीवी सत्यनारायण की फिल्म ‘अक्कड़ा अम्मई इक्कड़ा अब्बाई’ में नजर आए। यहीं से पर्दे पर उनके सफर की शुरुआत हुई। इसके बाद साल 1997 में उनकी दूसरी फिल्म ‘गोकुलमलो सीता’ रिलीजज हुई, जो एक ड्रामा फिल्म थी। इसी फिल्म में पहली बार उन्हें ‘पवन कल्याण’ नाम से क्रेडिट दिया गया, जो आगे चलकर उनकी स्थायी पहचान बन गया। उनकी तीसरी फिल्म ‘सुस्वागतम’ उनके करियर में एक खास मोड़ लेकर आई। इसी फिल्म में उन्हें पहली बार ‘पावर स्टार’ की उपाधि दी गई और यही टाइटल आगे चलकर उनके प्रशंसकों के बीच सम्मान और दीवानगी का प्रतीक बन गया।
‘थोली प्रेमा’ से स्टारडम, ‘गब्बर सिंह’ से धमाकेदार वापसी
पवन कल्याण के करियर को असली ऊंचाई मिली साल 1998 में रिलीज हुई फिल्म ‘थोली प्रेमा’ से, जिसका निर्देशन ए. करुणाकरण ने किया था। यह फिल्म तेलुगु सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित रोमांटिक फिल्मों में से एक बन गई। ‘थोली प्रेमा’ ने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में तेलुगु की सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का सम्मान जीता, साथ ही इसे छह राज्य नंदी पुरस्कार भी मिले। इतना ही नहीं, इस फिल्म को भारत के 30वें अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में भी प्रदर्शित किया गया।
इस सफलता के बाद पवन कल्याण ने लगातार कई हिट
फिल्मों के जरिए दर्शकों के दिलों में अपनी मजबूत जगह बना ली। हालांकि, उनके करियर में एक ऐसा दौर भी आया जब चुनौतियां बढ़ गईं और कुछ फिल्में अपेक्षाएं पूरी नहीं कर सकीं। लेकिन 2012 में निर्देशक हरीश शंकर की फिल्म ‘गब्बर सिंह’ के साथ उन्होंने धमाकेदार वापसी की। यह फिल्म न केवल क्रिटिकली सराही गई, बल्कि अपने समय की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली तेलुगु फिल्म भी बनी।
पवन कल्याण का उपमुख्यमंत्री बनने तक का सफर
14 मार्च 2014 को पवन कल्याण ने फिल्मी मंच से आगे बढ़कर राजनीति की दुनिया में कदम रखा और ‘जनसेना पार्टी’ की स्थापना की। साल 2014 के आम चुनावों में उन्होंने खुद चुनाव नहीं लड़ा, लेकिन उन्होंने भाजपा और तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के गठबंधन को जोरदार समर्थन दिया और चुनाव प्रचार में खुलकर हिस्सा लिया। इस दौरान उनकी लोकप्रियता का जबरदस्त असर देखने को मिला। हालांकि, साल 2017 से 2020 तक जनसेना पार्टी और भाजपा के बीच दूरी देखी गई। हालांकि बाद में राजनीतिक समीकरण बदले और पवन कल्याण का यह राजनीतिक सफर 2024 में नई ऊंचाई पर पहुंचा। उन्होंने 12 जून 2024 को आंध्र प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। इसके कुछ ही दिन बाद 16 जून 2024 को उन्हें आंध्र प्रदेश का उपमुख्यमंत्री नियुक्त किया गया।
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