नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क । दिल्ली हाईकोर्ट ने 200 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस की उस याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा है, जिसमें उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज किए गए आरोप पत्र से अपना नाम हटाने की सिफारिश की थी। अब सभी की नजरें कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, जो जैकलीन के लिए राहत या नई चुनौती बन सकती है। बता दें कि यह मामला ठग सुकेश चंद्रशेखर से महंगे उपहार प्राप्त करने के आरोपों के इर्द-गिर्द घूमता है।
कोर्ट में पेश हुईं जैकलीन की ये दलीलें
न्यायमूर्ति अनीश दयाल की पीठ ने दोनों पक्षों की विस्तार से सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ अग्रवाल ने जैकलीन फर्नांडीज का प्रतिनिधित्व किया, जबकि विशेष वकील जोहेब हुसैन प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से पेश हुए।
जैकलीन पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला नहीं बनता
जैकलीन के वकील सिद्धार्थ अग्रवाल ने तर्क दिया कि जैकलीन को सुकेश के किसी भी अपराध की कोई जानकारी नहीं थी, उन्हें जो भी उपहार या पैसा मिला वह सुकेश द्वारा केवल एक प्रशंसक के रूप में उपहार के तौर पर दिए गए थे, न कि किसी अपराध से जुड़े लाभ के लिए। इसलिए जैकलीन पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला नहीं बनता।
ईडी का दावा 15 व्यक्तियों के बीच पैसे बांटे गए
बहस के दौरान अग्रवाल ने तर्क दिया कि यदि ईडी का दावा है कि 15 व्यक्तियों के बीच पैसे बांटे गए हैं तो उस तर्क के अनुसार इसमें शामिल प्रत्येक व्यक्ति चाहे वह किराना विक्रेता हो, कोर्ट के अधिकारी हों या वकील हों उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग का दोषी माना जा सकता है। वहीं उन्होंने ये सवाल भी उठाया कि किसी अपराधी से जुड़ा कोई भी वित्तीय लेन-देन अपने आप मनी लॉन्ड्रिंग माना जाता है, उन्होंने सुझाव दिया कि इस तरह की व्याख्या से बेवजह डर पैदा होगा।
ईडी ने जैकलीन को बनाया आरोपी
ईडी ने 200 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक्ट्रेस जैकलीन को भी आरोपी बनाया है। यह मामले में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा जांच और कार्रवाई की गई है। जिसमें सुकेश पर रेलिगेयर एंटरप्राइजेज के पूर्व प्रमोटर शिविंदर मोहन सिंह की पत्नी अदिति सिंह से 200 करोड़ की ठगी और जबरन वसूली का आरोप है। अब हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की ओर से दलीलें सुनने के बाद ये फैसला सुरक्षित रख लिया है।





