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Wednesday, April 8, 2026
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डायरेक्टर सुभाष घई लीलावती अस्पताल के आईसीयू में भर्ती, सांस लेने में आ रही दिक्कत

सौदागर, खलनायक, परदेश, ताल, कालीचरण, हीरो, विधाता, मेरी जंग, कर्मा, राम-लाखन जैसी सुपट डुपर हिट फिल्‍में देनेवाले फिल्म निर्देशक सुभाष घई मुंबई के लीलावती अस्पताल के आईसीयू में भर्ती हैं।

नई दिल्‍ली/ रफ्तार डेस्‍क । सौदागर, खलनायक, परदेश, ताल, कालीचरण, हीरो, विधाता, मेरी जंग, कर्मा, राम-लाखन जैसी सुपट डुपर हिट फिल्‍में देनेवाले फिल्म निर्देशक सुभाष घई मुंबई के लीलावती अस्पताल के आईसीयू में भर्ती हैं। 79 साल के सुभाष को सांस लेने में दिक्कत के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया है, पता चला है कि वह शारीरिक रूप से कमजोर हो गए हैं और उन्‍हें मानसिक रूप से परेशानी हो रही है, रह-रह कर उनका सिर घूम रहा है। हालांकि, सुभाष घई के सहायक का कहना है कि चिंता की कोई बात नहीं । वे रूटीन चेकअप के लिए अस्पताल में हैं। उन्‍होंने सभी को इस बात के लिए भी धन्यवाद दिया जाता है कि लोग घई की सेहत को लेकर चिंतित हैं।

इससे पहले जब सुभाष को मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया था तब उनकी मेडिकल हिस्ट्री से पता चला था कि वह इस्केमिक हार्ट डिजीज से पीड़ित हैं। इसके अलावा, हाल ही में उन्हें हाइपोथायरायडिज्म का पता चला था। वह डॉ. रोहित देशपांडे की देखरेख में आईसीयू में भर्ती हैं। दरअसल, इस्केमिक हृदय रोग एक ऐसी बिमारी है जिसमें कि हृदय में रक्त की आपूर्ति को कम हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप शरीर को हार्ट ऑक्सीजन की पूर्ति नहीं कर पाता है। चिकित्‍सक इस रोग के बारे में यह भी बताते हैं कि यह हृदय की धमनियों में रक्त का प्रवाह कम होने के कारण हृदय के कमज़ोर होने की स्थिति है। इसे कोरोनरी हृदय रोग या कोरोनरी धमनी रोग भी कहा जाता है। इस रोग में, हृदय को रक्त की आपूर्ति करने वाली कोरोनरी धमनियां संकरी हो जाती हैं। इस रोग में, कोरोनरी धमनियों में वसायुक्त पदार्थ जमा हो जाता है, जिसे एथेरोमा या प्लाक कहते हैं और तब इस रोग में, सीने में दर्द या सांस लेने में तकलीफ़ जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं, इस रोग में, रक्त के थक्के बनने का खतरा बढ़ जाता है जोकि दिल का दौरा पड़ने का अक्‍सर कारण बनता है । 

सुभाष ने बॉलीवुड में अपने करियर की शुरुआत एक अभिनेता के तौर पर की थी। उन्होंने ‘तकदीर’, ‘आराधना’ में भी छोटी भूमिकाएं निभाईं। उन्हें फिल्म ‘उमंग’ और ‘गुमराह’ में भी देखा गया था। लेकिन अभिनेता के रूप में सुभाष को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने निर्देशन में अपने को अजमाया और उनके निर्देशन में बनी कालीचरण, हीरो, विधाता, मेरी जंग, कर्मा, राम-लाखन, सौदागर, खलनायक, परदेश, ताल, बेहद लोकप्रिय हुईं।

सामाजिक मुद्दे पर बनी फिल्म ‘इकबाल’ के लिए सुभाष ने 2006 में राष्ट्रीय पुरस्कार भी जीता। उसी वर्ष, व्हिस्लिंग वुड्स ने मुंबई में अंतरराष्ट्रीय फिल्म और मीडिया संस्थान की शुरुआत की। हाल ही में सुभाष गोवा फिल्म फेस्टिवल में भी शामिल हुए थे। वहां उनके जीवन पर आधारित ‘कर्माज चाइल्ड: द स्टोरी ऑफ इंडियन सिनेमाज अल्टीमेट शोमैन’ प्रदर्शित की गई। 2022 में सुभाष ने फिल्म ’36 फार्महाउस’ का निर्माण किया। वह उनका अब तक का आखिरी काम है।

आपको बता दें कि सुभाष का जन्म नागपुर में हुआ, पिता दिल्ली में डेंटिस्ट रहे, जबकि उनकी पढ़ाई-लिखाई और पालन-पोषण हरियाणा में हुआ है । भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान में दाखिला लेने के बाद उन्‍होंने फिल्‍म, नाटक से जुड़ी बारीकियां सीखीं, एक इंटरव्यू में सुभाष ने बताया था कि उनमें आत्मविश्वास की बहुत कमी थी, शुरू में उन्‍होंने राजेश खन्ना और धीरज कुमार के साथ प्रतिभावान के तौर पर काम किया लेकिन वे अभिनय में सफल नहीं हो सके, पर जब वे निर्देशन में उतरे तो तुरंत उन्‍हें आशातीत सफलता मिली।

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