नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। बॉलीवुड अभिनेता दादा साहब फाल्के का जन्म 30 अप्रैल 1870 को हुआ था। उन्हें हिंदी सिनेमा का जन्मदाता भी कहा जाता है क्यों की उन्होंने पहली बार राजा हरिश्चंद्र नाम की फुल लेंथ फीचर फिल्म बनाई थी। दादा साहब फाल्के के नाम से अभी तक इंडस्ट्री में कई कलाकारों को सम्मानित किया जा चुका है। आज हम उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर उनके बारे में जानेंगे कि दादा साहब फाल्के के नाम पर सिनेमा में कलाकारों को सबसे बड़ा सम्मान क्यों दिया जाता है।
क्या था दादा साहब फाल्के का असली नाम
दादा साहब फाल्के अपने समय के निर्देशक ही नहीं बल्कि फिल्म निर्माता के साथ-साथ स्क्रीन राइटर भी थे। दादा साहब फाल्के ने अपने 19 साल के सिनेमा के करियर में 95 फ़िल्में और 27 शॉर्ट फिल्में बनाई थी। दादा साहब फाल्के का असली नाम बहुत कम लोगों को पता है जो धुंधिराज गोविंद फाल्के था।
करियर की टर्निंग पॉइंट फिल्म
दादा साहब फाल्के ने अपने फ़िल्मी करियर में कई सारी फिल्में बनाई है। इनमें से एक फिल्म ‘द लाइफ ऑफ क्रिस्ट’ है जो उनके करियर का टर्निंग पॉइंट रही है। उन्होंने इस फिल्म को बनाने के लिए अपनी पत्नी से पैसे उधार लिए थे। उस समय इस फिल्म को बनाने का बजट 15 हजार रुपए का था।
महिलाओं को भी दिया काम करने का मौका
एक रिपोर्ट के मुताबिक दादा साहब फाल्के ने अपनी फिल्मों में महिलाओं को भी काम करने का अच्छा मौका दिया था। दादा साहब की फिल्म भस्मासुर और मोहिनी में दो महिलाओं ने काम किया था। बता दें कि, इन महिलाओं का नाम दुर्गा और कमला था। दादा साहब फाल्के आखरी बार अपनी मूक फिल्म ‘सेतुबंधन’ में नजर आए थे। इसके बाद वह 16 फरवरी 1944 में दुनिया को अलविदा कह गए थे।
सबसे सम्मानित पुरस्कार है दादा साहब फाल्के
भारतीय सिनेमा में दादा साहेब फाल्के के योगदान को एक ऐतिहासिक नजरिए से देखा जाता है। इस वजह से भारत सरकार ने साल 1969 में उनके सम्मान में दादा साहब फाल्के का अवार्ड देने की शुरुआत की। बता दें कि, यह सम्मान सिनेमा का सर्वोच्च और प्रतिष्ठित पुरस्कार माना जाता है।




