नई दिल्ली, रफ्तार न्यूज। बॉलीवुड की ड्रीम गर्ल और नृत्यांगना हेमा मालिनी ने अपने चार दशकों के करियर में कई सफल फिल्मों में काम किया है। लेकिन, करियर की शुरुआत में उन्हें एक बार एक निर्माता-निर्देशक से यह सुनना पड़ा था कि उनमें स्टार अपील नहीं है। यह बात तब की है जब उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा था। तमिल निर्देशक श्रीधर ने उन्हें अपनी फिल्म में काम देने से मना कर दिया। मगर इसके बाद उसी निर्देशक ने 1973 में उनकी लोकप्रियता को देखते हुए गहरी चाल फिल्म बनाई। आज हेमा मालिनी अपना 76वां जन्मदिन मना रहीं है। मगर क्या आपको पता है कि ड्रीम गर्ल ने नेत्र दान किया है। यह कितना आश्चर्यचकित करने वाली बात है न? मगर आज हम आपको हेमा मालिनी के इसी रोचक बातों के बारे में बताएंगे।
हेमा मालिनी ने किया नेत्रदान
ड्रीम गर्ल अपने फिल्मों के अलावा भी कई कार्यों के लिए चर्चित हैं। उन्होंने साल 2007 में नेत्रदान किया और लोगों को जागरूक करने की कोशिश की कि अधिक से अधिक लोग नेत्रदान करें।
ड्रीम गर्ल पर लिखी जा चुकी है बायोग्राफी
हेमा मालिनी की 69वें जन्मदिन पर ‘बियांड द ड्रीम गर्ल’ (Beyond The Dream Girl) नाम से उनकी बायोग्राफी भी प्रकाशित हुई। इस बायोग्राफी को राम कमल मुखर्जी ने लिखा है। इस बायोग्रफी के पीछे की खास बात यह है कि ऐसा पहली बार है जब किसी देश के प्रधानमंत्री ने किसी बॉलीवुड स्टार के लिए शुरुआती पन्नों में कुछ शब्द लिखे है। पीएम नरेंद्र मोदी ने हेमा मालिनी की बायोग्राफी के लिए सटीक और मिठास भरी बाते लिखी है।
फिल्म निर्माता की बेटी थी हेमा मालिनी
हेमा मालिनी का जन्म 16 अक्टूबर 1948 को तमिलनाडु के आमानकुंडी में हुआ था। उनकी मां, जया चक्रवर्ती, एक फिल्म निर्माता थीं, जिससे उनका झुकाव फिल्मों की ओर हो गया। उन्होंने अपनी शिक्षा चेन्नई में पूरी की। 1961 में उन्हें एक लघु नाटक ‘पांडव वनवासम’ में बतौर नर्तकी काम करने का मौका मिला।
कैसे बनी बॉलीवुड की ड्रीम गर्ल?
1968 में हेमा को राजकपूर के साथ फिल्म ‘सपनों का सौदागर’ में काम करने का अवसर मिला। इस फिल्म का प्रचार करते समय उन्हें ‘ड्रीम गर्ल’ का नाम मिला। हालांकि, फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही लेकिन दर्शकों ने उन्हें पसंद किया।
हेमा मालिनी को असली सफलता 1970 में फिल्म जॉनी मेरा नाम से मिली जिसमें उनके साथ देवानंद थे। यह फिल्म सुपरहिट रही और दर्शकों ने उनकी जोड़ी को सराहा। इसके बाद 1971 में रमेश सिप्पी की ‘अंदाज’ ने भी उन्हें बड़ी पहचान दिलाई।
1972 में सीता और गीता फिल्म ने उनके करियर को नई ऊँचाई दी। इस फिल्म की सफलता के बाद उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला।
हेमा और धर्मेन्द्र की जोड़ी को दर्शकों ने बहुत पसंद किया। उनका पहला फिल्म शराफत था। लेकिन शोले में बसंती और वीर के किरदार ने उन्हें और भी मशहूर कर दिया। उनकी जोड़ी ने कई सफल फिल्मों में काम किया जैसे ड्रीम गर्ल, राजा जानी, और द बर्निंग ट्रेन।
निर्देशन में हाथ आजमा चुकी हैं हेमा मालिनी
1990 में उन्होंने टेलीविजन की ओर रुख किया और धारावाहिक ‘नूपुर’ का निर्देशन किया। इसके बाद 1992 में उन्होंने शाहरुख खान के साथ ‘दिल आशना है’ फिल्म का निर्माण और निर्देशन किया।
राजनीति में रखा कदम
समाज सेवा के लिए हेमा ने राजनीति में भी कदम रखा और भारतीय जनता पार्टी से लोकसभा की सदस्य बनीं। आज हेमा मथुरा से BJP सांसद है।
पद्मश्री पुरस्कार मिल चुका है
2000 में उन्हें पद्मश्री पुरस्कार मिला। उन्होंने अपने करियर में लगभग 150 फिल्मों में काम किया है।





