नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना की जिंदगी संघर्ष और स्टारडम का बेजोड़ मिश्रण रही। उनका जन्म जतिन खन्ना के नाम से हुआ था और बचपन आर्थिक कठिनाइयों और परिवार से दूर रहकर बीता। बंटवारे के बाद उनका परिवार अमृतसर आ गया और पिता की नौकरी जाने के कारण आर्थिक तंगी ने उनके शुरुआती जीवन को प्रभावित किया। ऐसे हालातों में पिता ने राजेश की जिम्मेदारी मुंबई में रहने वाले रिश्तेदारों को सौंप दी, जिससे उन्होंने अपने जीवन के शुरुआती सालों में मां-बाप का साथ खो दिया और आर्थिक कठिनाइयों का सामना किया।
राजेश खन्ना की एक्टिंग में रुचि बचपन से ही थी। मात्र दस साल की उम्र में उन्होंने थिएटर ज्वाइन कर लिया था। परिवार के विरोध और मुश्किलों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों का पीछा किया और फिल्मी करियर के लिए अपने नाम को जतिन खन्ना से बदलकर राजेश खन्ना कर लिया। 1966 में फिल्म ‘आखिरी खत’ से उन्होंने बॉलीवुड में डेब्यू किया। इसके बाद फिल्म ‘राज’ ने उन्हें दर्शकों के बीच अलग पहचान दिलाई और उनके स्टारडम की नींव मजबूत की।
राजेश खन्ना ने अपने करियर के पहले तीन सालों में ही 15 सुपरहिट फिल्मों के साथ रिकॉर्ड बनाया और लगातार बीस साल तक इंडस्ट्री पर राज किया। उनके करिश्माई व्यक्तित्व और अभिनय की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके फैंस के खतों को खोलने के लिए अलग कर्मचारी रखा जाता था। उनकी फिल्मों ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड बनाए बल्कि उन्होंने भारतीय सिनेमा में सुपरस्टार की परिभाषा ही बदल दी।
राजेश खन्ना का निजी जीवन भी लोगों के लिए हमेशा आकर्षण का केंद्र रहा। उन्होंने डिंम्पल कपाड़िया के साथ शादी की थी जिससे उनकी दो बेटियां ट्विंकल खन्ना और रिंकींखन्ना हुई। उनका परिवार उनके बच्चों के साथ हमेशा चर्चा में रहा। ट्विंकल खन्ना और रिंकींखन्ना जानी-मानी अभिनेत्री रही है जिसमें ट्विंकल खन्ना तो लेखक भी है। राजेश खन्ना ने अपने बच्चों को हमेशा अपने जीवन का अहम हिस्सा माना और उन्हें प्यार और मार्गदर्शन दिया।
राजेश खन्ना का जीवन संघर्ष, जुनून और मेहनत का उदाहरण है, जिसने उन्हें साधारण बचपन से निकलकर बॉलीवुड का पहला सुपरस्टार बनने तक का सफर तय कराया। उनके दमदार अभिनय और आकर्षक व्यक्तित्व ने उन्हें भारतीय सिनेमा के इतिहास में अमर बना दिया।





