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Monday, April 6, 2026
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Birth Anniversary: गरीबी में बेचा चाय, नसीरुद्दीन शाह की बचाई थी जान, जानें ओम पुरी के अनकहे किस्से

गरीबी और अपमान का सामना कर के भी ओम पुरी ने अभिनय को न केवल अपना पेशा बनाया बल्कि, आगे चलकर यही उनकी पहचान बन गई। आइए जानते है उनके जन्मदिन पर उनके जीवन से जुड़े अनसुने किस्सों के बारे में।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। हिंदी और आर्ट-सिनेमा के महान अभिनेता ओम पुरी (Om Puri) की ज़िन्दगी उसी तरह सशक्त और रंगीन थी जैसे उनके किरदार। गरीबी, अपमान और निजी जटिलताओं के बावजूद उन्होंने अभिनय में जो गहराई दी, वो कम ही कलाकार दे पाए। उनकी जिंदगी के कुछ ऐसे वाकये जो उनकी जन्मदिन पर याद किए जा रहे है जिसे शायद ही हर कोई जानता हो। गरीबी, अपमान और असफलताओं के बीच ओम पुरी ने जो सफर तय किया, वो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा। आइए, उनकी जयंती पर जानते हैं ओम पुरी से जुड़ी कुछ अनसुनी बातें।

ओम पुरी का जन्म अम्बाला (वर्तमान हरियाणा) में हुआ। परिवार के पास उनका कोई जन्म प्रमाण-पत्र नहीं था। बाबा-मां ने बताया कि वह दशहरा के दो दिन बाद पैदा हुए थे, जिसके बाद स्कूल में दाखिले के वक्त उनके अंकल ने बर्थ डेट 9 मार्च 1950 लिखवा दी थी। बाद में जब मां ने बताया कि उनका जन्म दशहरे के दो दिन बाद हुआ था, तो उन्होंने 1950 के कैलेंडर के हिसाब से 18 अक्टूबर 1950 को अपना जन्मदिन मान लिया।

परिवार की आर्थिक हालत बहुत खराब थी ओम पुरी का बचपन बेहद मुश्किलों में बीता। जब वे महज छह साल के थे, तभी उनके पिता पर सीमेंट चोरी का झूठा आरोप लगा और जेल हो गई। परिवार के सामने भूखमरी की नौबत आ गई। ऐसे में छोटे ओम पुरी ने पेट पालने के लिए चाय बेचना शुरू किया और ढाबों में दूसरों के जूठे बर्तन भी धोए, ताकि घर चल सके। 

प्रशिक्षण FTII और NSD का संघर्ष और पहचान

ओम पुरी ने अभिनय की पढ़ाई हासिल करने के लिए संस्थागत रास्ता चुना FTII (पुणे) और NSD से जुड़कर उन्होंने अपने हुनर को तराशा। FTII के प्रवेश-साक्षात्कार में कुछ सदस्यों ने कहा कि उनका चेहरा न हीरो जैसा है, न खलनायक और न ही कॉमेडियन इसलिए वे उपयोगी कैसे होंगे। लेकिन संस्थान के निदेशक गिरिश कर्नाड (Girish Karnad) की दखलअंदाजी पर उन्हें लिया गया और आगे चलकर उनकी कला ने साबित कर दिया कि यह निर्णय कितना सही था। एनएसडी में ओम पुरी के क्लासमेट थे नसीरुद्दीन शाह, जिनसे उनकी गहरी दोस्ती हो गई थी। वहीं FTII में वे डेविड धवन के रूममेट रहे। दिलचस्प बात यह है कि शुरुआत में डेविड को ओम पुरी पसंद नहीं थे और वे कम ह्यूमर वाला व्यक्ति मानते थे, लेकिन वक्त के साथ उनकी सोच बदल गई।

दोस्ती और घटनाएं — नसीरुद्दीन से गहरी दोस्ती और जान बचाने वाली घटना

एनएसडी/FTII के दौर से ही ओम पुरी और नसीरुद्दीन शाह के बीच गहरी दोस्ती रही। दोनों ने साथ पढ़ाई की और बाद में समान दौर के कई पठारों पर साथ काम किया। एक मशहूर किस्से के अनुसार 1977 में एक रेस्तरां में नसीरुद्दीन पर हमला हुआ उस समय ओम पुरी ने आगे आकर न केवल हमलावर को रोका बल्कि नसीरुद्दीन की जान भी बचाई। इस किस्से का ज़िक्र कई यादों और किताबों में मिलता है। 

FTII- वाले दोस्त और शुरुआती कल्चर शॉक

FTII के दिनों में उनका रूम-मेट डेविड धवन भी था। शुरुआत में डेविड को ओम का व्यवहार ‘ह्यूमरलेस’ लगा और वे कमरा बदलवाने की बात करते थे पर समय के साथ प्रोफेशनल लॉन्च और सफलता ने रिश्तों को परखा। यह किस्सा कई साक्ष्यों/साक्षात्कारों में मिलता है। 

निजी जिंदगी — शादी, किताब और दाम्पत्य करार में दरार

ओम पुरी की पहली शादी सीमा कपूर से हुई थी जो लंबे समय तक नहीं चली। बाद में उन्होंने पत्रकार नन्दिता पुरी से शादी की नन्दिता ने ओम पुरी की जीवनी “Unlikely Hero: Om Puri” लिखी; इस किताब में कई निजी और संवेदनशील बातें खुलकर लिखी गईं जिनके कारण दंपति के बीच विवाद और दूरियाँ बढ़ीं और अंततः अलगाव हुआ यह तथ्य और किताब दोनों सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं। साल 2009 में नंदिता ने अनलाइकली हीरो: द स्टोरी ऑफ ओम पुरी नामक किताब में खुलासा किया कि 14 साल की उम्र में ओम पुरी के एक 55 वर्षीय नौकरानी के साथ संबंध थे। ओम पुरी इस किताब से बहुत नाराज थे कि उनकी पत्नी ने बिना अनुमति के उनकी निजी जिंदगी की बातें सार्वजनिक कर दीं। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी ने उनके जीवन के महत्वपूर्ण हिस्सों को घटिया और सनसनीखेज गॉसिपबना दिया। साल 2016 में नंदिता और ओम पुरी अलग हो गए और 2017 में ओम पुरी का निधन हो गया। 

सड़क से स्क्रीन तक उनकी फ़िल्मी इबारत

ओम पुरी ने आर्ट-हाउस और कमर्शियल दोनों तरह की फिल्मों में क्रांतिकारी भूमिका निभाई ‘आक्रोश’, ‘अर्द्ध-सत्य’, ‘जाने भी दो यारों’, ‘चाची 420’, ‘हेरा फेरी’ जैसी फिल्मों से लेकर अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं तक उनकी पहुँच रही। छोटे से शुरू हुए संघर्ष से वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाने गए।

निधन और विवादास्पद मामलाः मौत की प्राथमिक रिपोर्ट और पोस्टमोर्टम रिपोर्ट

ओम पुरी का निधन 6 जनवरी 2017 को मुंबई में हुआ; शुरुआती सूचना के अनुसार वे दिल का दौरा पड़ने से बसे नहीं रहे। बाद में पोस्टमोर्टम रिपोर्ट और कुछ मीडिया रिपोर्टों ने सिरे पर चोट और अन्य विवरणों का जिक्र किया, जिसके कारण कुछ समय के लिए घटनास्थल की परिस्थितियों पर सवाल उठे, पुलिस ने जांच की और फौली प्ले की संभावनाओं को रद्द किया गया था। 

ओम पुरी की विरासत

ओम पुरी सिर्फ कलाकार नहीं थे कई कलाकारों के मेंटर रहे, थिएटर और फिल्म-स्कूल के छात्र-विचारों को प्रभावित किया और भारतीय सिनेमा में ‘विश्व-स्तर के अभिनेता’ के रूप में अपना स्थान पक्का किया। उनके किरदार आज भी फिल्मों और थिएटर में पढ़ाए जाते हैं।

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